यूपी: नेपियर की खेती से खत्म होगा हरा चारा संकट, किसानों ने अपनाई नई तकनीक, एक बार बोआई और 3 साल तक मुनाफा

 प्रदेश में पशुओं को नेपियर घास तंदुरुस्त बनाएगी और हरा चारा की कमी दूर करेगी। नेपियर की एक बार खेती करने पर तीन साल तक पैदावार होगी। इसमें हर वर्ष लागत नहीं आएगी। पशुपालन विभाग की ”नेपियर घास की रूट स्लिप” योजना के तहत एक हजार किसानों ने 230 हेक्टेयर में नेपियर घास की खेती की है। इन्हें प्रोत्साहन के लिए चार हजार रुपये विभाग द्वार दिए गए हैं।संयुक्त निदेशक डॉ. एसके राय ने बताया कि नेपियर अत्यधिक पौष्टिक हरा चारा है। इसमें प्रोटीन, रेशा, कैल्शियम और फास्फोरस होता है।

खासकर दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद है। तीन साल तक सात से आठ फसलें होती हैं। सरकारी फार्म के 30 हेक्टेयर में नेपियर की जड़े तैयार करके अप्रैल में किसानों को निशुल्क वितरित करके खेती कराई है। 60 दिन में घास तैयार हो जाएगी।इसके अलावा अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत प्रति .1 हेक्टेयर के लिए ढाई किलो बरसीम व तीन किलो चरी बीज की 24,896 मिनी किट किसानों को वितरित की हैं।

योजना के तहत कुल 4,156 हेक्टेयर में हरा चारा की पैदावार किसान करके पशुओं को खिलाएंगे। गो-आश्रय से सम्बद्ध चरागाह पर 2,815 हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए ज्वार, मक्का व बाजरा के बीज वितरित किए हैं। 

साथ ही 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बोवाई, सिंचाई, श्रमिक आदि खर्च के लिए दिए हैं। इससे बाहरी निर्भरता खत्म होगी और गोवंशों को नियमित हरा चारा मिलेगा। हर जिले से एक पशु चिकित्सक और एक कृषि विभाग का अधिकारी झांसी हरा चारा का प्रशिक्षण प्राप्त करने गए हैं। जो हर विकास खंड में 50-50 किसानों को प्रशिक्षित करेंगे।

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