नगर निगम के सभी 110 वार्डों में बने ट्रिपल आर सेंटर शो-पीस बनकर रह गए हैं। सेंटर कूड़े को रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल करने के उद्देश्य से बनाए गए सेंटर कागजों पर ही संचालित हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण के समय ही नगर निगम के अधिकारियों को इनकी याद आती है।
दरअसल स्वच्छ सर्वेक्षण में इन सेंटर के 100 अंक निर्धारित हैं। ये सेंटर स्वच्छ सर्वेक्षण के समय खुलते हैं और फिर पूरे साल बंद हो जाते हैं। इनमें न कर्मचारी रहता है न कोई सामान लेने वाला। इससे इन सेंटरों का उद्देश्य केवल अंक बटोरने तक सीमित रह गया है।बेकार की चीजों से काम का सामान बनाया जाता है। ट्रिपल आर सेंटर खोलने का उद्देश्य घरों में पड़ी बेकार की वस्तुओं से काम का सामान बनाया जाना है। जरूरतमंद इन सेंटरों से अपने काम की वस्तुएं नि:शुल्क ले सकते हैं। इससे घरों में पड़ा कूड़ा इधर-उधर फेंका नहीं जाएगा। इसे सेंटरों में दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा और रिसाइकल करके काम की वस्तुएं बनाई जाती हैं। लेकिन लखनऊ नगर निगम इन सेंटरों का सही तरीके से इस्तेमाल शुरू नहीं कर पाया है।
कर्मचारी हैं न कोई सामान लेने वाला
नगर निगम ने तीन वर्ष पहले प्रत्येक वार्ड में एक आरआरआर सेंटर खोल तो दिए लेकिन इनका संचालन अभी तक सही तरीके से नहीं कर पाया है। इनमें कर्मचारी हैं न कोई सामान लेने वाला। दरअसल जब लोग इन सेंटरों पर घर में पड़ी बेकार वस्तुएं जैसे कपड़े और अन्य वस्तुएं देने जाते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है या कोई सामान लेने वाला तक नहीं होता है। इससे लोग सामान कूड़े में फेंक देते हैं।
