यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आत्मनिर्भर मॉडल को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट (GANGA) प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया है। प्रोजेक्ट गंगा के जरिये प्रदेश की ग्राम पंचायतों में डिजिटल क्रांति की तैयारी है। पहले चरण में करीब 8 हजार युवाओं को डिजिटल एंटरप्रेन्योर (उद्यमी) बनाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मॉडल आत्मनिर्भरता वाला होना चाहिए। यूपी के गांवों की सूरत बदल रही है। सभी 57,700 ग्राम पंचायतों के अपने ग्राम सचिवालय हैं। सचिवालय भी एक-दो कमरों का नहीं बल्कि चार से छह कमरे हैं। डिजिटल पुस्तकालय है। ग्रामीणों के सारे काम सचिवालय से हो रहे हैं। सरकार ने पंचायत सहायक रखे हैं, जो जन्म, मृत्यु, जाति, निवास समेत अन्य प्रमाण पत्र बनाने में मदद कर रहे हैं। अब ग्रामीणों को प्रमाण पत्रों के लिए गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बीसी सखी का मॉडल भी सफल है।
मां गंगा के नाम पर प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा का नाम मां गंगा के नाम पर होना ही सुखद अनुभूति है। मां गंगा के आर्शीवाद से ही भारत सोने की चिड़िया था। मां गंगा के आर्शीवाद से ही भरपूर खाद्यान्न उपलब्ध हो रहा।
यूपी में सीएम युवा स्कीम
सीएम ने कहा कि यूपी के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहले से ही सीएम युवा योजना चल रही है। अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए युवाओं को 5 लाख तक का गारंटी और ऋण मुक्त ब्याज दिया जा रहा है। आज यूपी में करीब 2 लाख युवा अपना सफल व्यवसाय कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट गंगा में चयन से ट्रेनिंग तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हम यूपी के 30 जिलों में प्रोजेक्ट गंगा स्कीम शुरू करने जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य सभी 75 जिलों तक ले जाना है। अभी यूपी में 350 तहसीलें और 825 ब्लॉक हैं। 8 हजार न्याय पंचायते और 57,700 ग्राम पंचायते हैं। प्रोजेक्ट गंगा हर गांव तक पहुंचाना है। प्रोजेक्ट गंगा में अभ्यर्थियों का चयन काफी महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। सीएम युवा स्कीम के जरिये व्यवसाय प्रारंभ करने में आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।
7 हजार पंचायतों तक ब्राडबैंड
अभी यूपी की करीब 7 हजार ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड की सुविधा पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार के बजट में 8 हजार न्याय पंचायतों तक डिजिटल सशक्तिकरण के लिए बजट आवंटित किया गया है। यह काफी वैज्ञानिक मॉडल है। इस तरह हम गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित कर सकते हैं।
