नई दिल्ली, 23 अप्रैल (केसरिया न्यूज़)। आज के समय में रास्ता भटकना लगभग असंभव हो गया है। बस एक स्मार्टफोन या कार का नेविगेशन सिस्टम चालू करें और सटीक जगह का पता चल जाता है। यह संभव होता है ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस की मदद से, जो अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के नेटवर्क पर आधारित एक आधुनिक तकनीक है।
जीपीएस हमें पृथ्वी पर कहीं भी अपनी सटीक लोकेशन बताता है लेकिन सवाल यह है कि जीपीएस आखिर है क्या और यह इतनी सटीक जानकारी कैसे देता है। जीपीएस दरअसल 30 से अधिक नेविगेशन सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क है, जो पृथ्वी के चारों ओर बहुत ऊंची कक्षा में लगातार घूमते रहते हैं। ये सैटेलाइट हर समय विशेष सिग्नल भेजते रहते हैं। आपके फोन, वॉच या कार में लगा जीपीएस रिसीवर इन सिग्नल्स को पकड़ता है और गणना करके बताता है कि आप ठीक कहां खड़े हैं।
यह सिस्टम तीन मुख्य हिस्सों से मिलकर काम करता है, सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन और रिसीवर। सैटेलाइट पृथ्वी से करीब 20 हजार किलोमीटर ऊपर 12 घंटे के चक्कर में घूमते हैं। इनकी व्यवस्था ऐसी है कि पृथ्वी पर किसी भी जगह से लगभग हमेशा 6 या उससे ज्यादा सैटेलाइट दिखाई देते हैं। ग्राउंड स्टेशन पृथ्वी पर बने स्टेशन हैं जो इन सैटेलाइट की स्थिति की जांच करते रहते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सही पथ पर रखते हैं। वहीं, रिसीवर सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हम रोज इस्तेमाल करते हैं। जब रिसीवर कम से कम चार सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है, तो वह हर सैटेलाइट से अपनी दूरी का हिसाब लगाता है। इन दूरी के आधार पर रिसीवर त्रिकोणमिति यानी ट्राइलेटरेशन की मदद से आपकी सटीक जगह पता लगा लेता है।
आम रिसीवर कुछ मीटर की सटीकता देते हैं, जबकि हाई रिसीवर तो कुछ इंच की दूरी तक सही लोकेशन बता सकते हैं। पुराने समय में नाविक तारों को देखकर दिशा का पता लगाते थे। आज उसी काम को सैटेलाइट बहुत तेजी और सटीकता से करते हैं। जीपीएस सिर्फ रास्ता दिखाने तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल विमानों, जहाजों, सेना, किसानों, डिलीवरी सर्विस और यहां तक कि भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी होता है।
जीपीएस अमेरिका की रक्षा विभाग की टीम द्वारा विकसित किया गया सिस्टम है, लेकिन अब ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) के रूप में कई देशों के सैटेलाइट काम कर रहे हैं। रूस का जीएलओएनएएसएस भी इसीका हिस्सा है, जिसमें 24 सैटेलाइट हैं। ये सैटेलाइटेस खास रेडियो फ्रीक्वेंसी पर कोड भेजते हैं, जिन्हें रिसीवर डिकोड करके इस्तेमाल करता है। दुनिया भर में सैकड़ों स्थायी रिसीवर लगे हैं, जो वैज्ञानिकों को पृथ्वी की प्लेटों की हलचल, भूकंप और पृथ्वी के घूमने की दिशा अध्ययन करने में मदद करते हैं।
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