लखनऊ: सोच-समझकर दें किराए पर मकान, पूर्व DG की 22 करोड़ की प्रॉपर्टी पर कब्जा, जानें कानूनी दावं-पेंच 

क्या आप भी अपना घर, दुकान या कोई व्यावसायिक परिसर किराए पर देने की सोच रहे हैं? अगर हाँ, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आई यह खबर आपकी आंखें खोलने के लिए काफी है। आज के दौर में बिना पूरी कानूनी जानकारी के किसी को अपनी प्रॉपर्टी सौंपना कितना बड़ा आत्मघाती कदम हो सकता है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि सूबे के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) हरिशचंद्र सिंह जैसा ‘दबंग’ अफसर भी आज अपने ही बंगले को खाली कराने के लिए दर-दर भटक रहा है।

जब पुलिस महकमे के सबसे बड़े पद पर रहे अधिकारी का रूतबा अपनों के ही सामने बेअसर साबित हो जाए, तो आम जनता की चिंता बढ़ना लाजिमी है। आइए, लखनऊ के इस हाई-प्रोफाइल केस के जरिए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और कानून की दुनिया के दिग्गज वकीलों सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री एडवोकेट गौरी शंकर चतुर्वेदी और हाईकोर्ट के एडवोकेट विपिन कुमार पाल  की इस पर क्या राय है।

नहीं मिल पाई कानूनी मदद

इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि पूर्व DG ने इस अवैध कब्जे की शिकायत अपने ही महकमे के मौजूदा आलाधिकारियों और कप्तानों से की। उम्मीद थी कि एक पूर्व डीजी की शिकायत पर पुलिस तुरंत एक्शन लेगी, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस बैकफुट पर रही और पूर्व महानिदेशक को अपने ही विभाग से कोई राहत नहीं मिली। इसी के चलते मामला अब सिविल कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है।

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