पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ा जोखिम, तेल बाजार में अनिश्चितता और विदेशी मुद्रा मुख्य कारण


नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार के फाइनेंस डिवीजन की मार्च इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल बाजार इस समय काफी अनिश्चितता में है। कई जगह सप्लाई में रुकावट आई है, जिससे कच्चे तेल के बाजार में तनाव बढ़ गया है। साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने स्थिति को और खराब कर दिया है।

कराची के बिजनेस रिकॉर्डर में छपे एक लेख के मुताबिक, इन सब कारणों से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

30 मार्च को आईएमएफ ने कहा कि मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया में पहले से ही कम विदेशी मुद्रा भंडार और सीमित मार्केट एक्सेस होने के कारण बाहर से आने वाले आर्थिक झटके ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। खासकर जब ईंधन, खाद और खाने-पीने की चीजों के आयात बिल बढ़ जाते हैं, जिससे ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और करेंसी पर दबाव आता है।

यह बात पाकिस्तान के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि 19 मार्च 2026 तक उसके विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर थे। यह तीन फरवरी 2023 के तीन अरब डॉलर (2916.7 मिलियन डॉलर) से काफी ज्यादा है, लेकिन इसमें से 12 अरब डॉलर से ज्यादा हर साल तीन दोस्त देशों से रोल ओवर (कर्ज की अवधि बढ़ाना) के रूप में आता है। बाकी पैसा दूसरे मल्टीलेटरल और बाइलेटरल स्रोतों से उधार लिया गया है, या फिर यूरोबॉन्ड और सुकूक के जरिए लिया गया कर्ज है, जिसकी अवधि पूरी होने पर भुगतान करना होता है।

लेख में यह भी बताया गया है कि सिर्फ इसी महीने संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से 3.45 अरब डॉलर का लोन वापस मांग लिया। हालांकि, एतिसलात की ओर से पाकिस्तान को दिए जाने वाले 800 मिलियन डॉलर को लेकर कोई नई मांग नहीं की गई, जो पीटीसीएल के निजीकरण के समय से जुड़ा मामला है। इसके अलावा, इसी हफ्ते 1.4 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी किया गया।

पिछले तीन-चार साल से पाकिस्तान का विदेशी कमर्शियल मार्केट तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर है और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने उसे निवेश योग्य ग्रेड नहीं दिया है।

हालांकि, पिछले साल आईएमएफ प्रोग्राम में होने की वजह से रेटिंग में सुधार की बात कही गई थी, फिर भी पाकिस्तान की रेटिंग अभी भी काफी जोखिम वाली कैटेगरी में है। इसका मतलब है कि डिफॉल्ट का खतरा बना हुआ है। अभी तो वह अपने वित्तीय दायित्व निभा रहा है, लेकिन अगर आर्थिक हालात और बिगड़े, तो भुगतान करना मुश्किल हो सकता है।

लेख के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कारोबारी माहौल को और ज्यादा प्रभावित कर रहा है, जैसा कि दुनिया के बाकी देशों पर भी असर पड़ा है।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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