किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन के ट्रॉमा सेंटर से जांच के लिए मरीजों को निजी केंद्र भेजा जा रहा है। डॉक्टरों और एजेंटों से सांठगांठ का आलम यह है कि तीमारदारों को बाकायदा एजेंट का मोबाइल नंबर भी मुहैया कराया जा रहा है। मामले का एक तीमारदार ने वीडियो बनाकर वायरल किया है। जिसके बाद संस्थान प्रशासन जांच क्र कार्रवाई की बात कही है।
ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए प्रदेश भर से गंभीर मरीज आते हैं। सड़क हादसे में जख्मी गोसाईगंज के रहने वाले विकास झा (35) को परिजन इलाज के लिए केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। ट्रॉमा में मरीज को भर्ती करके इलाज मुहैया कराया गया। जिसके बाद मरीज को आर्थोपैडिक विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। पैर में फैक्चर होने पर डॉक्टरों ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी। इसके लिए टूडी ईको सहित कई जांचे लिखी गईं। डॉक्टर ने टूडी ईको के लिए लारी कार्डियोलॉजी जाने को कहा। पर्चे पर अर्जेन्ट भी लिखा। साथ ही चौक स्थित एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के एजेंट का नंबर भी दिया। कहा कि यहां से तत्काल जांच करा ले तो ऑपरेशन आज ही हो जाएगा। परिजन के मुताबिक एजेंट से बात करने पर उसने टूडी ईको जांच का 2500 रुपये शुल्क बताया। आर्थिक तंगी के कारण परिजन ने निजी केंद्र से जांच कराने में असमर्थता जताई। वहीं लारी में जांच न हो पाने के कारण शुक्रवार को होने वाला ऑपरेशन आगे के दिनों के लिए टाल दिया गया। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही मिले तो संबंधित डॉक्टर पर कार्रवाई होगी।
दलाली के आरोप में 15 से अधिक डॉक्टर व कर्मचारी निकाले जा चुके
ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की दलाली का यह कोई नया मामला नहीं है। बीते दिनों मरीजों की दलाली को लेकर केजीएमयू की ओर से कराई गई जांच में इस पूरे खेल में तीन एंबुलेंस चालकों और कई संविदा कर्मचारियों की मिलीभगत पाई गई है। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीनों चालकों को नौकरी से हटा दिया है, वहीं अब तक 15 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।
