नगर निगम की हालत फुस्सः स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार कहीं पिछड़ न जाए लखनऊ

 स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की शुरुआत हो चुकी है। इस बार सर्वेक्षण कुल 12500 अंकों का है। पिछली बार लखनऊ नगर निगम ने शिवरी में कूड़ा निस्तारण के लिए तीन प्लांट चालू कर स्वच्छ रैंकिंग में देश में तीसरा स्थान हासिल किया था। लेकिन इस बार अपना लखनऊ रैंकिंग में कहीं पिछड़ न जाए। लखनऊ नगर निगम में कूड़ा प्रबंधन देख रहीं कार्यदाई संस्थाओं की लापरवाही इसका मुख्य कारण बन सकता है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से लेकर पड़ाव घरों से समय पर कूड़ा नहीं उठ रहा है। संस्थाओं के कर्मचारी हफ्तों कूड़ा उठाने घर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा रोड स्वीपिंग और नालियों की सफाई में भी संस्थाएं मनमानी कर रही हैं। इससे शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। जबकि केंद्र की स्वच्छ सर्वेक्षण टीम कभी भी दौरा करने लखनऊ पहुंच सकती है। नगर निगम की लापरवाही स्वच्छ रैंकिंग पर भारी पड़ सकती है।

आवासीय क्षेत्रों में गंदगी का पड़ेगा असर

विजिबल क्लीननेस के स्वच्छ सर्वेक्षण में 1500 अंक हैं। आवासीय क्षेत्र में सड़कों और नालियों की सफाई व्यवस्था बदतर हो चुकी है। सड़कों पर हफ्तों झाड़ू लगती है न नालियों की सफाई। मुख्य मार्गों पर भी कार्यदाई संस्थाओं ने कूड़ा घर बना दिए हैं। बाजारों में नाइट स्वीपिंग व्यवस्था नगर निगम बंद कर चुका है। इससे बाजारों में गंदगी रहती है। जबकि आवासीय और कॉमर्शियल एरिया में सफाई के 150-150 अंक हैं।

कूड़ा कलेक्शन और पृथक्कीकरण के कट सकते हैं 1000 अंक

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के लिए इस बार डोर-टू-डोर कलेक्शन एंड ट्रांसपोर्टेशन और सेग्रीगेशन (पृथक्कीकरण) के 1000 अंक निर्धारित हैं। शहर के आधे घरों से भी डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं हो रहा है, जबकि इसके 500 अंक हैं। इसके अलावा नगर निगम के कर्मचारी घरों से सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं ले रहे हैं, इसके 400 अंक हैं। घरों से कूड़ा न उठने के कारण लोग यूजर चार्ज भी नहीं दे रहे हैं। इसके 100 अंक हैं। यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ ताे नगर निगम के आधे से अधिक अंक कट सकते हैं।

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