नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने व्यापार समझौते से लेकर रक्षा सहयोग और क्रिटिकल मिनरल्स तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच जरूरी मिनरल्स पर बातचीत हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ अपनी मीटिंग के दौरान डॉ जयशंकर ने कहा, “हमने असल में कई अच्छे विकास देखे हैं। हमारे प्रधानमंत्री नवंबर में मिले थे। हमें जनवरी में आपके स्पीकर को होस्ट करने का मौका मिला था। हमारा थोड़ा जटिल मंत्रिस्तरीय ढांचा काम कर रहा है, इसलिए अलग-अलग मंत्री और मंत्रालय एक-दूसरे से मिल रहे हैं। जहां व्यापार और निवेश की बात है, हम ईसीटीए, ईसीटीए से एआईसीए पर जाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। ऊर्जा के पक्ष में हमारे पास एनर्जी व्यापार है।”
विदेश मंत्री ने कहा कि हम इसे यूरेनियम सप्लाई में भी बढ़ाना चाहते हैं। हमारे अपने न्यूक्लियर क्षेत्र में सुधार हुआ है, जिससे न्यूक्लियर ऊर्जा बढ़ेगी। हमारी टीमें जरूरी मिनरल्स पर भी बातचीत कर रही हैं।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि लोग एक-दूसरे से बात कर रहे हैं। हमारा रक्षा एक्सचेंज और अभ्यास फिर से हो रहे हैं। समुद्री सहयोग इसका केंद्र रहा है। हमने स्पेस सहयोग पर कुछ बातचीत की है। स्पोर्ट्स एक मुद्दा है, जो फिर से बहुत ज्यादा रडार पर है। बेशक, आज क्वाड मीटिंग में हमारी सुबह बहुत अच्छी रही, लेकिन आज शाम, मैं बाकी दुनिया के बारे में भी बात करना चाहूंगा। हमारा पड़ोस, आपका पड़ोस, बाकी दुनिया और वे ट्राइलेटरल जिनका हम दोनों हिस्सा हैं।”
क्वाड की बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने बताया कि क्वाड देश कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे, जैसे समुद्री निगरानी और डोमेन अवेयरनेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल्स, ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण और आपदा राहत गतिविधियां।
जयशंकर ने कहा, “यह हमारी 2026 की पहली बैठक है। हमने 2025 में दो बार मुलाकात की थी। जाहिर है कि ज्यादातर चर्चा और द्विपक्षीय बातचीत दुनिया की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रही। क्वाड के सदस्य होने के नाते हमने इंडो-पैसिफिक से जुड़े मुद्दों पर खास ध्यान दिया, क्योंकि हम समुद्री सीमा वाले चार लोकतंत्रिक देश हैं, जो इंडो-पैसिफिक के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं। विचारों का आदान-प्रदान काफी उपयोगी रहा।”
उन्होंने कहा, “समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिसमें निगरानी और डोमेन अवेयरनेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्री केबल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपदा राहत गतिविधियां शामिल हैं। हम आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ाते रहेंगे। हमने सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री व्यापार के मुद्दे पर भी चर्चा की और अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्ती से पालन करने के महत्व को दोहराया। हमारे चारों देश बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं। हम मानते हैं कि आर्थिक मजबूती बढ़ाई जानी चाहिए, सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए, भरोसेमंद तकनीक को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। हमारी बातचीत में ऊर्जा, उर्वरक, क्रिटिकल मिनरल्स और संसाधनों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। हमारा लक्ष्य है कि हम आपसी सहयोग बढ़ाएं और साथ ही अन्य देशों की भी मदद करें।”
–आईएएनएस
केके/डीकेपी
