ब्रिटेन ने रूस पर लगाए नए प्रतिबंध, रूसी दूतावास ने बताया बेकार


लंदन, 26 मई (आईएएनएस)। ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। वहीं, लंदन में रूसी दूतावास ने मंगलवार को कहा कि ब्रिटिश अधिकारी यह मानने में नाकाम रहे कि रूस विरोधी प्रतिबंध ‘बेकार’ हैं।

रूस की सरकारी मीडिया टास न्यूज एजेंसी ने बताया, “लंदन ने एक बार फिर रूस के खिलाफ गैर-कानूनी पाबंदियों को बढ़ाने का ऐलान किया है, इस बार कुछ ‘क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क’ से निपटने के झूठे बहाने से। ब्रिटिश अधिकारी साफ बात मानने से इनकार कर रहे हैं कि रूस के खिलाफ पाबंदियां बेकार हैं।”

रूसी दूतावास ने आगे कहा कि “हमारा देश लंबे समय से बाहरी दबाव के हिसाब से खुद को ढाल रहा है और लंदन की मर्जी के हिसाब से अपना रास्ता नहीं बदलेगा। इन बढ़ती पाबंदियों का असर सबसे पहले और सबसे ज्यादा ब्रिटेन के नागरिकों, बिजनेस और रेप्युटेशन पर पड़ेगा। जाहिर है, ऐसी कोशिशों को समर्थन करने वालों को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।”

ब्रिटेन ने मंगलवार को 18 कंपनियों पर बैन बढ़ा दिए। उन्होंने कहा कि ये कंपनियां सीधे रूस के गैर-कानूनी फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करती हैं, जिसका इस्तेमाल फंड ट्रांसफर करने, सामान खरीदने और अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए किया जाता है।

ब्रिटेन सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक, ये बैन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और ‘ए7 नेटवर्क’ को टारगेट करते हैं, जिसका इस्तेमाल रूस मौजूदा पाबंदियों से बचने और यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई को बढ़ावा देने के लिए फंड भेजने के लिए करता है।” ये बैन तुरंत लागू होंगे।

विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा, “अगर क्रेमलिन को लगता है कि वह क्रिप्टो नेटवर्क और शैडो फाइनेंशियल सिस्टम के पीछे छिपकर हमारे बैन से बच सकता है, तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। UK, रूस के बैन से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नए तरीकों को टारगेट करने के लिए अपने तरीके को बदल रहा है और उसे मज़बूत कर रहा है। हम उस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर रहे हैं जो उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था को सहारा देता है, ठीक उसी समय जब यूक्रेन युद्ध के मैदान में रूस पर दबाव बढ़ा रहा है।”

इस बीच, लंदन में रूसी दूतावास ने कहा कि “यह ध्यान देने वाली बात है कि ब्रिटिश अधिकारी दूसरों पर ‘ओपेक फाइनेंशियल मैकेनिज्म’ इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं, जबकि लोकल पॉलिटिकल क्लास की जेब में जाने वाले बड़े क्रिप्टोकरेंसी डोनेशन को नजरअंदाज करते हैं। शायद ‘शैडो स्कीम’ के खिलाफ लड़ाई वेस्टमिंस्टर से शुरू होनी चाहिए, बिश्केक या त्बिलिसी से नहीं।”

ब्रिटेन की सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक, “ए7 नेटवर्क क्रेमलिन का समर्थन वाला सिस्टम है जिसे पश्चिमी देशों के बैन को बायपास करने, मिलिट्री खरीद को फाइनेंस करने और तेल की बिक्री से मिले फंड को प्रोसेस करके यूक्रेन के खिलाफ हमलों की फंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। नेटवर्क ने दावा किया कि पिछले साल उसने 90 बिलियन डॉलर से ज्यादा पैसे ट्रांसफर किए, जो रूस के सालाना सैन्य खर्च का लगभग आधा है।”

–आईएएनएस

केके/डीकेपी


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