नई दिल्ली, 8 मई (केसरिया न्यूज़)। हंता वायरस के इंसान से इंसान में फैलने की दर काफी कम है, इसलिए इसके महामारी का रूप लेने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। एक नवीनतम रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया कि भारत में इस वायरस के मौजूदा प्रकोप से जुड़ी कोई व्यापक या आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई मौत सामने नहीं आई है।
एलारा कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि हंता वायरस की संक्रमण फैलाने की क्षमता कम होने के कारण, इसके मामले गंभीर होने के बावजूद आमतौर पर स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहते हैं और खुद ही नियंत्रित हो जाते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया भर में हंता वायरस संक्रमण अभी भी बहुत दुर्लभ हैं और इसके लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) द्वारा स्वीकृत कोई खास वैक्सीन या एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है।
हंता वायरस एक आरएनए वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों से इंसानों में फैलता है। यह संक्रमण चूहों के पेशाब, मल या लार के सूक्ष्म कणों के सांस के जरिए शरीर में जाने से होता है। रिपोर्ट में कहा गया कि हंता वायरस के केवल कुछ विशेष प्रकार, खासकर एंडीज स्ट्रेन, में बहुत दुर्लभ मामलों में इंसान से इंसान में संक्रमण देखा गया है।
रिपोर्ट में हंता वायरस और कोविड-19 के बीच बड़ा अंतर भी बताया गया। कोविड-19 पैदा करने वाला सार्स-कोव-2 वायरस बहुत तेजी से फैला और वैश्विक महामारी बन गया था, जबकि हंता वायरस की फैलने की क्षमता काफी सीमित है।
दुनिया में हंता वायरस से जुड़ी दो प्रमुख बीमारियां देखी गई हैं। पहली है हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम, जो अमेरिका में पाया जाता है और गंभीर श्वसन विफलता का कारण बन सकता है। इसमें मृत्यु दर 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। दूसरी बीमारी है हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफआरएस), जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है। यह किडनी और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है तथा गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर एंडीज स्ट्रेन से जुड़े कुछ मामले सामने आए, जिनमें तीन लोगों की मौत हुई। हालांकि संक्रमण सीमित स्तर तक ही रहा।
हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम का पहला बड़ा प्रकोप 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स क्षेत्र (एरिजोना, न्यू मैक्सिको, कोलोराडो और यूटा) में सामने आया था, और यह संक्रमण सिन नोम्ब्रे वायरस के कारण हुआ था। उस दौरान 53 मामले सामने आए थे, जिनमें 32 लोगों की मौत हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन में 2004 से 2019 के बीच एचएफआरएस के लगभग 2.1 लाख मामले और करीब 1,855 मौतें दर्ज की गईं। वहीं अमेरिका में 1993 से 2022 के बीच हंता वायरस संक्रमण के कुल 864 मामले सामने आए, जिनमें लगभग 302 लोगों की मौत हुई।
–केसरिया न्यूज़
