यूपी: जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाना अफसरों को पड़ेगा भारी, मुख्य सचिव ने जारी किया नया शासनादेश

प्रदेश सरकार ने सांसदों और विधायकों के फोन कॉल नजरअंदाज करने और उनके प्रति निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने इस संबंध में गुरुवार को नया शासनादेश जारी करते हुए सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।शासनादेश में कहा गया है कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन रिसीव नहीं करते, कॉल बैक नहीं करते और प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई मामलों को सदन, पीठ और संसदीय अनुश्रवण समिति तक उठाया गया है, जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया है।मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सांसदों और विधायकों के सीयूजी नंबर तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य मोबाइल नंबर अधिकारियों को अपने फोन में सेव रखने होंगे। कॉल आने पर उसे अनिवार्य रूप से रिसीव करना होगा। यदि अधिकारी बैठक या अन्य कारण से उपलब्ध नहीं हैं तो प्राथमिकता के आधार पर कॉल बैक करना होगा।

शासनादेश में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधि यदि किसी जनहित के मुद्दे को लेकर कार्यालय पहुंचते हैं तो अधिकारियों को अपनी सीट से खड़े होकर उनका स्वागत करना होगा। उनसे सम्मानपूर्वक बातचीत करनी होगी और जल ग्रहण के लिए आग्रह भी करना होगा। साथ ही उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर सुनकर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

सरकार ने साफ किया है कि प्रोटोकॉल उल्लंघन उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के नियम 3(2) के दायरे में माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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