बिश्वनाथ, 14 जून (आईएएनएस)। भारत की साइकिलिस्ट और पर्वतारोही आशा मालवीय ने देश की महिलाओं को खास संदेश दिया है। उनका कहना है कि महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए घर से बाहर निकलने की जरूरत है। 78वें आर्मी डे के अवसर पर जयपुर से साइकलिंग पर निकलीं आशा शनिवार को असम के बिश्वनाथ पहुंचीं।
आशा ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए बताया, “मैं 11 जनवरी से 78वें आर्मी डे के अवसर पर जयपुर से निकली हूं। जयपुर से साइकलिंग करते हुए मैं असम के बिश्वनाथ चार्ली पहुंची हूं। मुझे लगभग 4 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। मैं 7700 से ज्यादा किलोमीटर की यात्राएं पूरी कर चुकी हूं। इससे पहले मैं संपूर्ण भारत में 26,000 किलोमीटर साइकलिंग महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से पूरी कर चुकी हूं। उसके बाद मैंने कन्याकुमारी से सियाचिन, सियाचिन से उमलिंगला, उमलिंगला से दिल्ली, और दिल्ली से भोपाल तक की साइकिल यात्राएं की हैं।”
आशा ने आगे कहा, “यह मेरी सातवीं यात्रा है और मेरी यात्रा का उद्देश्य है नारी शक्ति, देशभक्ति, अदम्य साहस, और इस यात्रा के माध्यम से मैं पूरे भारत देश के युवाओं को यह संदेश देना चाहती हूं कि आज भारत देश का युवा जो सोच सकता है वो कर सकता है; सिर्फ जरूरत है तो एक सोच की, एक विचार की।”
आशा ने महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए घर से निकलने का खास संदेश दिया। उन्होंने कहा, “भारत देश की महिलाओं में मैंने बहुत सारी महिलाएं ऐसी देखी हैं, जो आज भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहतीं। हालांकि, मैं सभी महिलाओं से यह कहना चाहूंगी कि आप घर से बाहर निकलिए। मैं अगर अकेले पूरे भारत घूम सकती हूं, तो आपको सिर्फ अपने सपनों के लिए मेहनत करनी है। जो महिलाएं घर से बाहर निकल जाती हैं, उनके सपने कभी अधूरे नहीं रहते हैं।” आशा ने बताया कि भारतीय सेना ने उनका हमेशा काफी सहयोग किया है और इस यात्रा में भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिल रहा है। आशा के अनुसार, इस यात्रा के खत्म होने के बाद वह एक और यात्रा पर निकलेंगी, जिसकी शुरुआत 15 अगस्त, 2026 से होगी।
–आईएएनएस
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