'हमने सम्मान में बोला था', शिवाजी महाराज विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने साजिश की आशंका जताई


नागपुर, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने रविवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर विवाद पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि विवाद और मीडिया का ध्यान उनके भाग्य का हिस्सा बन गया है।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “नागपुर में जब भी हम आते हैं, कुछ न कुछ हो ही जाता है। पिछली बार हमने कुछ नहीं कहा था, फिर भी विवाद खड़ा हो गया। इस बार हमने सम्मान के बारे में सकारात्मक बातें कीं कि छत्रपति शिवाजी महाराज कितने संत-तुल्य और समर्पित थे, लेकिन उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया।”

उन्होंने आगे बताया कि कुछ लोग लगातार सनातन और संतों का विरोध करते रहे हैं। उनका मकसद संतों और महंत को नीचा दिखाना है।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “यह भी संभव है कि इसके पीछे कोई साजिश हो, क्योंकि जो कोई पूरा बयान सुनेगा और सही अर्थ समझेगा, वह इसे गलत नहीं मानेगा। हमने कुछ भी अनुचित नहीं कहा। हमने सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से बात की थी। इसके बावजूद हमने खेद व्यक्त किया और माफी भी मांगी है।”

उन्होंने आस्था और अंधविश्वास के बीच के अंतर पर भी विस्तार से बात की। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “आस्था और अंधविश्वास के बीच बहुत बारीक लकीर होती है। समझ पर आधारित विश्वास ही आस्था है, जबकि बिना समझ के किया गया विश्वास अंधविश्वास है। हम कभी यह नहीं कहते कि लोग हमारी पूजा करें। हर सभा और प्रवचन में हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हम लोगों को खुद से जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें भगवान बालाजी हनुमान से जोड़ने के लिए हैं।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “अगर भगवान हनुमान के प्रति भक्ति बढ़ाना, हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए प्रेरित करना या हनुमान मंदिरों में जाने के लिए कहना अंधविश्वास है तो फिर इस देश के सभी धर्मों को अंधविश्वास ही मानना पड़ेगा।”

धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका मंच किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए नहीं है, बल्कि तथाकथित चमत्कारों के नाम पर हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए है। हम तो बस भगवान हनुमान से प्रार्थना करते हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “संदर्भ बिल्कुल अलग था। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा कि वह अपने ही लोगों से युद्ध नहीं करेंगे, तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।”

उन्होंने कहा, “हमने संतों और महान विभूतियों से सुना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की संतों के प्रति अगाध श्रद्धा और अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी। हमने यह बात किसी का अपमान करने के लिए नहीं कही थी। हमारा उद्देश्य केवल उनकी महानता को उजागर करना था कि वे संतों के प्रति कितने गहरे रूप से समर्पित थे, लेकिन एक छोटा सा अंश संदर्भ से काटकर फैला दिया गया।”

धीरेंद्र शास्त्री ने जनसंख्या नियंत्रण पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अगर जनसंख्या नियंत्रण होता है तो यह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। ऐसे लोग हैं जिनके बहुत ज्यादा बच्चे हैं, और जब हमने हिंदुओं में चार बच्चों की भी बात की तो इससे विवाद खड़ा हो गया।”

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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