आस्था और पर्यटन को लगे पंख,यूपी का नया ‘स्पिरिचुअल कॉरिडोर’, गंगा एक्सप्रेसवे से अब 6 घंटे में मेरठ-प्रयागराज का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ ही प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों के बीच की दूरियां सिमट गई हैं।

करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बना यह छह लेन का वर्ल्ड-क्लास कॉरिडोर केवल यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने वाला एक मजबूत आध्यात्मिक कॉरिडोर बन चुका है।

मेरठ से प्रयागराज: 12 घंटे का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में

गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ्तार और समय की बचत है। मेरठ से प्रयागराज के बीच लगने वाला 10 से 12 घंटे का समय अब घटकर लगभग 5 से 6 घंटे रह जाने की उम्मीद है।

यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होता है। इससे न केवल आम यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत का संगम

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोता है। यह मार्ग हापुड़ के ब्रजघाट, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर और अमरोहा के वासुदेव मंदिर जैसे आस्था केंद्रों को इको-टूरिज्म स्थलों के साथ जोड़ता है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, यह एक्सप्रेस-वे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और उन्नाव के नवाबगंज जैसे इको-टूरिज्म क्षेत्रों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ से लेकर प्रयागराज के ब्लैकबक रिजर्व तक, अब पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश को एक्सप्लोर करना पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज होगा।

हस्तिनापुर और संभल: धार्मिक पर्यटन को मिली नई संजीवनी

इस एक्सप्रेसवे का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव मेरठ के हस्तिनापुर पर दिखने वाला है। महाभारत कालीन इतिहास और जैन धर्म के इस प्रमुख तीर्थ स्थल पर योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की पर्यटन परियोजनाएं चला रही है। बेहतर कनेक्टिविटी से पाण्डेश्वर महादेव मंदिर और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थलों पर दिल्ली-एनसीआर से पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा। वहीं, संभल में विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल और ‘कल्कि धाम’ तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बल मिलेगा।

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