सरकारी खरीद के मानकों के फेर में धीमी गति से चल रही गेहूं खरीद अब गति पकड़ रही है। इस साल प्रदेश भर में बेमौसम वर्षा, ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। दानों की चमक कम हुई और फसल में टूटन भी बहुत है।
ऐसे में क्रय केंद्रों पर इसकी खरीद नहीं हो पा रही थी। केंद्र सरकार द्वारा मानकों में रियायत देने के बाद किसान क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। आठ दिन में ही 3.98 लाख टन गेहूं का विक्रय किया है।वहीं राज्य सरकार ने भी फार्मर आईडी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है, साथ ही सत्यापन की बाध्यता में भी राहत दी है। इसके बाद क्रय केंद्रों पर किसानों की आमद बढ़ी है।
खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल तक 7,12029 टन गेहूं की खरीद हुई है। 1,36,435 किसानों से यह खरीद की गई है। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4,10,883 टन और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 301146 टन की खरीद हुई है।
इसके चलते 22 अप्रैल तक 3.14 लाख टन गेहूं की ही खरीद हो पाई थी। किसानों की समस्याओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने केंद्र से मानकों में ढील देने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार ने राहत देते हुए 70 प्रतिशत तक कम चमक और 20 प्रतिशत तक टूटन वाले गेहूं की खरीद की अनुमति प्रदान की है।
