कागज पर मोबाइल नंबर और नाम नोट किया, पार्सल लिया और चल दिए। यात्रियों की सुरक्षा से बेपरवाह पार्सल की जांच करना तक मुनासिब नहीं समझते। मुसाफिरों के पास ही पार्सल रख दिया और रोडवेज बस लेकर चल पडे़ गंतव्य की ओर। नियम है कि बिना बुकिंग के कोई पार्सल न ले जाया जाए। लेकिन परिवहन निगम की बसों में बिना किसी आधिकारिक बुकिंग, रसीद और जांच-पड़ताल के पार्सलों की ”ढुलाई” से ”कमाई” का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बस संचालकों और परिचालकों द्वारा केवल मोबाइल नंबर और तय रकम के आधार पर पार्सल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाए जा रहे हैं। चालक और परिचालक पार्सल को ‘लगेज’ का नाम देकर बसों में रख लेते हैं। पार्सल भेजने वाले से दूरी और सामान के आकार के हिसाब से रकम तय की जाती है। पैसा पहले ही ले लिया जाता है।
पॉलीटेक्निक चौराहा, कमता हो या फिर चिनहट, सभी जगहों पर खासतौर पर सुबह के वक्त पार्सल और फूलों के बंडल रोडवेज बसों से भेजे जाते देखे जा सकते हैं। बस स्टेशन परिसर और यात्री पिकिंग प्वाइंट पर भी इस तरह का नजारा आम मिलता है। लोग बस अड्डे तक आए बिना भी केवल मोबाइल नंबर साझा कर पार्सल भेज देते हैं और निर्धारित स्थान पर दूसरा व्यक्ति उसे प्राप्त कर लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई दस्तावेज तैयार होता है और न ही किसी प्रकार का रिकॉर्ड रखा जाता है। लखनऊ क्षेत्र से प्रतिदिन एक हजार से अधिक रोडवेज बसों का संचालन होता है।
चेकिंग स्वायड समय-समय पर चेकिंग विभिन्न मार्गों पर चेकिंग करता है और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई भी की जाती है। 40 इंटरसेप्टर वाहनों के द्वारा भी अधिकारी बीच रास्तें में बसों को रोककर चेकिंग करते है।
