प्रदेश सरकार अब परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में संवाद कौशल, आत्मविश्वास और प्रभावी अभिव्यक्ति विकसित करने पर विशेष फोकस कर रही है। नई शिक्षा नीति और फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) मिशन के अंतर्गत शिक्षकों को विशेष डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि बच्चों को आत्मविश्वास के साथ बोलने, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और कक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार किया जा सके।इसी क्रम में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के माध्यम से ‘डेवलपिंग ओरेसी इन प्राइमरी ग्रेड्स’ कोर्स को प्रदेशभर के शिक्षकों तक पहुंचाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की बोलने और सुनने की क्षमता को मजबूत बनाना है, ताकि उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स को मिली अहम जिम्मेदारी
शासन स्तर से एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने ब्लॉक और जनपद में अधिक से अधिक शिक्षकों को इस कोर्स से जोड़ें। इसके जरिए प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों में संवाद आधारित शिक्षण संस्कृति विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल प्रशिक्षण से आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा
सरकार शिक्षकों को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इससे शिक्षकों को नए शिक्षण मॉडल सीखने के साथ कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
