लखनऊ: पांडुलिपियों की विरासत पर 13 को राष्ट्रीय मंथन, राजकीय अभिलेखागार मनाएगा 77वां स्थापना दिवस

उप्र. राजकीय अभिलेखागार अपने 77 वें स्थापना दिवस के अवसर पर 13 मई को राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय संगोष्ठी और अभिलेख प्रदर्शनी आयोजित करेगा। शहीद स्मृति भवन में होने वाले इस कार्यक्रम का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में पांडुलिपियों का महत्व एवं भावी पीढ़ी के लिए उपयोगिता’ रखा गया है।

कार्यक्रम में प्रो. अजय तनेजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. अविनाश चन्द्र मिश्रा मौजूद रहेंगे। संगोष्ठी में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान भारतीय ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों और अभिलेख संरक्षण पर अपने विचार रखेंगे।

सरकार संरक्षित करेगी 40 ऐतिहासिक स्मारक

राज्य सरकार ने प्रदेश के 40 स्मारकों और एतिहासिक स्थलों को संरक्षित घोषित करने का निर्णय लिया है। साथ ही तीन स्थलों को असंरक्षित घोषित किया गया है। संरक्षित किए जाने वाले कई स्मारक 2,500 से 3,000 वर्ष पुराने हैं, जबकि कुछ अवशेष कुषाण काल के प्रतीत होते हैं। यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को दी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि जर्जर और खंडहर में तब्दील हो रहे इन स्मारकों को संरक्षित कर नया स्वरूप दिया जाएगा। पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे धार्मिक और विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

संरक्षित किए जाने वाले स्मारक सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, कानपुर नगर, रायबरेली, लखनऊ, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, देवरिया, जालौन, ललितपुर, झांसी, महोबा, गाजीपुर, वाराणसी, आगरा, मैनपुरी, सहारनपुर और रामपुर में स्थित हैं।

संरक्षित घोषित स्थलों में मूसाबाग, बिठूर का प्राचीन शिव मंदिर, गंगकुंड, गढ़वई दुर्ग, मंगलगढ़ किला और मिर्जा देहलवी का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। जिन तीन स्मारकों को असंरक्षित घोषित किया गया है, उनमें कंसकिला, गोण्डवानी मंदिर और अमरगढ़ शिव मंदिर शामिल हैं।

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