प्रदेश सरकार इस मानसून सीजन में पौधारोपण को लेकर एक बार फिर बड़ा अभियान चलाने जा रही है। एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रदेश भर की 2634 पौधशालाओं में कुल 56.33 करोड़ पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि अभियान को व्यापक और सफल बनाया जा सके।
इस बार के अभियान की खास बात यह है कि इसमें 30 प्रतिशत पौधे फलदार प्रजातियों के लगाए जाएंगे। पिछले वर्ष 20 प्रतिशत फलदार पौधे ही लगाए गए थे। इस वर्ष 10 प्रतिशत अधिक फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य है। इससे न सिर्फ हरियाली बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण स्तर को भी मजबूती मिलेगी।फलदार पौधों में आम, जामुन, इमली, आंवला, बेल, कैथा, कटहल, अमरूद, अनार, बेर और महुआ जैसी प्रजातियां शामिल हैं, जो पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका का भी सहारा बनेंगी। पौधारोपण महाभियान में इस बार सर्वाधिक 32 प्रतिशत पौधे औद्योगिक और इमारती लकड़ी वाली प्रजातियों के लगाए जाएंगे।
हालांकि, यह पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत कम हैं। वर्ष 2025 में 35 प्रतिशत पौधे इस प्रजाति के लगाए गए थे। इनमें शीशम, सागौन, खैर, बांस और सेमल प्रमुख हैं। इस प्रजाति के पौधों से भविष्य में लकड़ी की जरूरतों की पूर्ति के साथ आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित होगा।
पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए 18 प्रतिशत पौधे पीपल, बरगद, पाकड़, गुटेल, चिलबिल और गूलर जैसी पारंपरिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियों के लगाए जाएंगे। ये पौधे जैव विविधता को बढ़ाने और वायु गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सरकार का मानना है कि इस महाभियान से प्रदेश में न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी मदद मिलेगी।
