प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ ने शुरुआती 42 दिनों में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए देश के सामने एक प्रभावी मॉडल पेश किया है। बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग, जांच, उपचार और जन-जागरूकता गतिविधियों के जरिए प्रदेश में टीबी उन्मूलन को लेकर मजबूत आधार तैयार किया गया है।अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष ने अभियान की समीक्षा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के ‘टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक के परिणाम उत्साहजनक हैं।
प्रदेश में 24 मार्च को शुरू किए गए इस अभियान के तहत उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से व्यापक स्क्रीनिंग की जा रही है। अब तक 15,03,112 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें एक दिन में 45,810 लोगों की जांच भी शामिल है।
मरीज पहचान और उपचार में तेजी
अभियान के दौरान 68,273 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जबकि 28,763 मरीजों का ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए आकलन किया गया। वहीं 1,24,633 संपर्कों की पहचान कर 72,285 लोगों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया गया है, जो रोकथाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
तकनीक और मॉनिटरिंग से मिली रफ्तार
जांच सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में 989 एक्स-रे मशीनों और 578 एनएएटी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अब तक 10,17,992 एक्स-रे और 2,76,446 मॉलिक्यूलर जांचें की गई हैं, जिनमें 2,21,698 प्रभावी जांच दर्ज हुई हैं। सभी आंकड़ों को निक्षय पोर्टल पर रियल-टाइम अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे पारदर्शिता और निगरानी बेहतर हो सके।
