लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अलीगंज स्थित उस इमारत पर बुधवार को नोटिस लगा दिया, जहां इस सप्ताह भीषण आग लगने की घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि इमारत के मालिक को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कानून के तहत इमारत के मालिक को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का अवसर देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, ”इस अवधि के दौरान प्राप्त किसी भी जवाब की जांच की जाएगी और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलता है और अंततः ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जाता है, तो प्राधिकरण इमारत को गिराने की कार्रवाई करेगा।”
इस दौरान पूरे राज्य में प्रशासन, विकास प्राधिकरणों और अग्निशमन सेवाओं की संयुक्त टीमों ने निरीक्षण अभियान चलाकर 100 से अधिक संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई की। एलडीए अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016 में भी इस तीन मंजिला इमारत की जांच की गई थी। उस समय पाया गया था कि स्वीकृत आवासीय नक्शे से अधिक निर्माण किया गया था और इमारत का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि इमारत के अनधिकृत हिस्से को गिराने का आदेश मई 2016 में जारी किया गया था। हालांकि, दो महीने से भी कम समय बाद इमारत के मालिक की उस आपत्ति के आधार पर कार्रवाई वापस ले ली गई, जिसमें उसने कहा था कि आदेश पारित करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया था।
अधिकारियों ने कहा कि अभिलेखों से पता चलता है कि ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने का निर्णय उसी अधिकारी ने लिया था जिसने पहले इसे गिराने का आदेश दिया था। इस निर्णय की परिस्थितियों की अब जांच की जा रही है। उपाध्यक्ष ने बताया कि एलडीए ने उस समय मामले को देखने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है और संबंधित अभिलेख तलब किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भवन आधिकारिक अभिलेखों में आवासीय दर्ज रहने के बावजूद व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होता रहा और उसके खिलाफ आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इमारत के मालिक ने मूल रूप से स्व-प्रमाणीकरण योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति प्राप्त की थी। प्राधिकरण यह भी जांच कर रहा है कि एलडीए कर्मियों और अन्य विभागों की किसी चूक के कारण परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं या नहीं। एलडीए ने मंगलवार को ध्वस्तीकरण नोटिस दोबारा जारी किया था और आवासीय भवन को व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में संचालित होने देने में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की थी।
