UP: करोड़ों के बाढ़ सुरक्षा कार्य में अनियमितता के आरोप…बाढ़ से पहले ही उजागर हुईं खामियां, कार्रवाई की मांग

तहसील क्षेत्र के ग्राम कोरिनपुरवा के पास सरयू नदी के किनारे कटान रोकने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे पिचिंग, स्टड और परकोपाइन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने ठेकेदार और बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से मानकों की अनदेखी कर निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाया है। बुधवार शाम निर्माण स्थल पर मजदूरों द्वारा बालू भरकर बोरियां लगाने का कार्य किया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार मौके पर केवल मेट मौजूद था, जबकि बाढ़ खंड विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा। इससे निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता को लेकर लोगों में नाराजगी है। 

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सरयू नदी की बालू से भरी गई कई बोरियां लगाने से पहले ही फट चुकी हैं। उनका कहना है कि अभी नदी का जलस्तर बढ़ना भी शुरू नहीं हुआ है और निर्माण कार्य की खामियां सामने आने लगी हैं। ऐसे में बाढ़ और कटान के समय यह परियोजना कितनी प्रभावी साबित होगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार नदी तटवर्ती गांवों को कटान और बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। वहीं बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी गुणवत्ता की निगरानी और अनियमितताओं पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक संबंधित ठेकेदारों को प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

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