MSME इकाइयों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट,बाल श्रम पर अंकुश लगाने का योगी आदित्यनाथ सरकार का बड़ा प्रयास

योगी आदित्यनाथ सरकार बाल श्रम पर अंकुश लगाने को लेकर काफी गंभीर है। सरकार ने बाल श्रम के खिलाफ सख्ती तेज करते हुए अब ‘रेस्क्यू के साथ पुनर्वास’ माडल को प्राथमिकता दी है।प्रदेश सरकार ने इसी कड़ी में कामकाजी बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छह से 12 महीने के ब्रिज कोर्स चलाने की तैयारी की है। इन कोर्सों के जरिये ऐसे बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप कक्षाओं में पढ़ने लायक बनाया जाएगा, ताकि वे सीधे स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ाई जारी रख सकें।बाल श्रम रोकने के लिए औद्योगिक इकाइयों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। एमएसमई इकाइयों के लिए ‘बाल श्रम मुक्त’ घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा और इसकी पुष्टि के लिए थर्ड पार्टी आडिट कराया जाएगा। इससे छोटे उद्योगों में छिपे बाल श्रम पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।


आर्थिक पहलू को ध्यान में रखते हुए सरकार बाल श्रमिक विद्या योजना को और प्रभावी बनाने जा रही है। इसके तहत बच्चों के माता-पिता को मिलने वाली सहायता को पीएम किसान और मनरेगा खातों से जोड़ने की तैयारी है। यदि कोई बच्चा दोबारा काम करते पाया जाता है, तो संबंधित परिवार की सब्सिडी अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।

इससे अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल भेजने का दबाव बढ़ेगा। ग्राम पंचायतों को भी इस अभियान में अहम भूमिका दी गई है। स्कूल में दाखिले के बाद बच्चों की नियमित उपस्थिति पर पंचायत स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। यदि कोई बच्चा लगातार 15 दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो इसकी सूचना ब्लाक स्तर पर भेजी जाएगी, ताकि समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।

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