उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में 29 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” बनने जा रहा है। बुनियादी ढांचे को औद्योगिक रफ्तार देने के लिए इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) मॉडल पर तैयार किया गया है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने की दिशा में संजीवनी साबित होगा।
594 किमी का विशाल इंडस्ट्रियल नेटवर्क
यूपीडा (UPEIDA) की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 594 किमी लंबे कॉरिडोर के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की है। मेरठ से प्रयागराज तक फैले इन नोड्स को वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स की आधुनिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक ‘इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट’ में बदल देगी, जिससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी।
क्षेत्रीय असमानता का अंत, हरदोई बनेगा सेंटर
यह एक्सप्रेसवे कॉरिडोर यूपी के 12 जिलों के बीच विकास के संतुलन को बेहतर करेगा। हरदोई, उन्नाव, प्रतापगढ़ और रायबरेली जैसे जिलों में, जहाँ औद्योगिक गतिविधियां कम थीं, अब वहां विकास की नई लहर दौड़ेगी। इस योजना में बुलंदशहर नोड सबसे बड़ा क्लस्टर होगा, जो 2,798 एकड़ में फैला है। योगी सरकार का लक्ष्य सड़क निर्माण को केवल आवाजाही तक सीमित न रखकर, उसे प्रदेश के औद्योगिक सशक्तिकरण का जरिया बनाना है।
मेरठ से प्रयागराज तक नोड्स की स्थिति (एट ए ग्लेंस)
गंगा एक्सप्रेसवे पर उद्योगों का जाल कुछ इस तरह बिछाया गया है:
- मध्य यूपी: संभल (591 एकड़), बदायूं (269 एकड़), शाहजहांपुर (252 एकड़) और हरदोई (335 एकड़)।
- पूर्वी एवं तराई क्षेत्र: उन्नाव (333 एकड़), रायबरेली (232 एकड़), प्रतापगढ़ (263 एकड़) और प्रयागराज (251 एकड़)।
