नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रिसर्च रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीएसटी कलेक्शन और बेसिक एक्साइज ड्यूटी (बीईडी) में राज्यों की हिस्सेदारी को मिलाकर राज्यों को वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में करीब 1.43 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में जीएसटी कलेक्शन में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है और इसकी सालाना वृद्धि 8-9 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के समय में जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार में आई नरमी मुख्य रूप से रेट रैशनलाइजेशन की वजह से है, जो पहले से अनुमानित थी।
संशोधित टैक्स व्यवस्था के तहत कंपेनसेशन सेस को समाप्त कर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एईडी) लागू की गई है। इसके बाद जीएसटी और बेसिक एक्साइज ड्यूटी से राज्यों की कुल हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 के लगभग 17.7 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 19.1 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि कुल राजस्व हिस्सेदारी का आकार बढ़ा है और इसका सीधा फायदा राज्यों को मिलेगा।
रिपोर्ट में बताया गया कि यदि वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में बेसिक एक्साइज ड्यूटी में 20 प्रतिशत वृद्धि मान ली जाए और पूरी अतिरिक्त राशि को एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एईडी) माना जाए, तो इसका अनुमानित मूल्य 35,874 करोड़ रुपए होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में यही राशि कंपेनसेशन सेस के रूप में राज्यों को पूरी मिलती थी, लेकिन नई व्यवस्था में राज्यों को एईडी का केवल 41 प्रतिशत, यानी 14,708 करोड़ रुपए ही मिलेगा। इस आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को लगभग 21,000 करोड़ रुपए का काल्पनिक नुकसान दिखाई देता है, लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि 28 राज्यों में इसे विभाजित करने पर यह राशि बहुत कम रह जाती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत जीएसटी किए जाने वाले पान और तंबाकू जैसे डीमेरिट गुड्स पर राज्यों को पहले की तुलना में अधिक राजस्व मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, 100 रुपए के टैक्स योग्य इंट्रा-स्टेट लेनदेन पर पहले राज्यों को 19.74 रुपए मिलते थे, जबकि नई व्यवस्था में यह बढ़कर 28.20 रुपए हो जाएगा।
इस तरह राज्यों को प्रति 100 रुपए के टैक्स योग्य लेनदेन पर 8.46 रुपए का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जबकि केंद्र का हिस्सा केवल 3.54 रुपए बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि उच्च कर दरों का लाभ राज्यों को भी पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है।
एसबीआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह धारणा सही नहीं है कि कंपेनसेशन सेस कभी केंद्र सरकार का राजस्व नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेस केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता था और पहले केंद्र के कर राजस्व के रूप में दर्ज होता था। इसके बाद इसे जीएसटी कंपेनसेशन फंड में स्थानांतरित किया जाता था, जहां से राज्यों को ग्रांट के रूप में भुगतान किया जाता था।
–आईएएनएस
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