रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे, मुंबई में खौफ कायम करना चाहता था गैंग


मुंबई, 21 मई (आईएएनएस)। बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच (एंटी-एक्सटॉर्शन सेल) द्वारा दाखिल चार्जशीट में कई बड़े और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी एक संगठित आपराधिक गैंग का हाथ था, जिसका मकसद मुंबई में अपना खौफ और वर्चस्व कायम करना था।

चार्जशीट के अनुसार, यह घटना 1 फरवरी 2026 की देर रात करीब 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच हुई थी। जुहू स्थित रोहित शेट्टी के घर ‘शेट्टी टॉवर’ पर तैनात निजी सुरक्षा गार्ड की शिकायत के आधार पर जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान अज्ञात हमलावरों ने रोहित शेट्टी को निशाना बनाकर उनके घर की दिशा में अंधाधुंध फायरिंग की थी। शुरुआत में मामला भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को सौंप दी गई।

गहन जांच, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दीं। 11 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद मकोका की धारा के तहत कार्रवाई की गई। मामले में अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

चार्जशीट में शुभम रामेश्वर लोंकरऔर नवीन कुमार दलित कुमार उर्फ आरजू बिश्नोई को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस का दावा है कि शुभम लोंकर ने ही इस संगठित आपराधिक गिरोह का गठन किया था।

जांच में यह भी सामने आया कि फायरिंग की घटना के तुरंत बाद आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर हमले की जिम्मेदारी ली थी। पोस्ट में बॉलीवुड को धमकी देते हुए कहा गया था कि ‘समय रहते सुधर जाओ, नहीं तो बाबा सिद्दीकी जैसा हाल करेंगे।’

चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ कि वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल का इंजन और चेसिस नंबर पूरी तरह खुरचकर मिटा दिया गया था, ताकि वाहन की पहचान छिपाई जा सके। आरटीओ जांच में इसकी पुष्टि हुई।

पुलिस के मुताबिक, वांटेड आरोपी आरजू बिश्नोई और शुभम लोंकर ने ही शूटरों को हथियार और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों के जरिए आरोपियों को आर्थिक मदद भी पहुंचाई गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद आरोपियों को अपने मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट करने के निर्देश दिए गए थे। मुंबई पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ ने मकोका के तहत सक्षम प्राधिकारी के सामने अपना कबूलनामा भी दर्ज कराया है। वहीं, मुंबई की कालीना फॉरेंसिक लैब की बैलिस्टिक रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि बरामद हथियारों से ही रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की गई थी।

–आईएएनएस

एएमटी/डीएससी


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