संभल हिंसा : मुख्य आरोपी मोहम्मद वारिस पर एनएसए, योगी सरकार की सख्त कार्रवाई


संभल, 23 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मुख्य आरोपी पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। हिंसा के मुख्य आरोपी मोहम्मद वारिस पर योगी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगा दिया है।

मोहम्मद वारिस को संभल हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह वर्ष 2012 से दुबई में छिपे शारिक साठा का गुर्गा भी बताया जाता है। वारिस पर आरोप है कि उसने हिंसा के दौरान अवैध हथियार मुहैया कराए और फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की जान चली गई।

हालांकि, इस मामले में इससे पहले भी सरकार दो लोगों पर एनएसए लगा चुकी है। इनमें मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम शामिल हैं।

सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब इस हिंसा मामले की जांच रिपोर्ट सामने आने वाली है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले ही मोहम्मद वारिस पर एनएसए लगाया गया है। इसे हिंसा के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी वारिस को अवैध हथियार मुहैया कराए गए थे।

पुलिस का कहना है कि शारिक साठा के इशारे पर वारिस, अफरोज और गुलाम ने संभल में हिंसा की साजिश रची थी। 25 जनवरी 2025 को पुलिस ने वारिस को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुल्ला अफरोज समेत 10 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं, मोहम्मद गुलाम को 20 फरवरी 2025 को संभल बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, मुल्ला अफरोज प्रॉपर्टी डीलर होने के साथ-साथ शारिक साठा के लिए भी काम करता था। वह दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी गाड़ियां चोरी कराकर नेपाल, पश्चिम बंगाल और असम में बेचता था।

गौरतलब है कि संभल हिंसा को लेकर 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे। अब तक 138 उपद्रवियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी ने छह मुख्य मुकदमों में कोर्ट के समक्ष 4,025 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क, जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली, मुल्ला अफरोज और मोहम्मद वारिस को नामजद आरोपी बनाया गया है।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम


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