जयपुर, 21 मई (आईएएनएस)। राजस्थान हाई कोर्ट ने निलंबित आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़े रिश्वत मामले में उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है।
यह आदेश गुरुवार को जस्टिस सुदेश बंसल की बेंच ने दिया। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने पहले इसी मामले में एक और आरोपी अधिकारी, आरएएस अधिकारी पुष्कर मित्तल के सस्पेंशन पर रोक लगा दी थी, और पिंकी मीणा का मामला भी उसी आधार पर है।
कोर्ट ने कहा कि सस्पेंशन रिव्यू कमेटी पिंकी मीणा का सस्पेंशन जारी रखने का कोई खास कारण नहीं बता पाई।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 15 जनवरी, 2021 से सस्पेंशन पर हैं। करीब पांच साल बाद उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल चार्जशीट दी गई है। समानता बनाए रखने के लिए सस्पेंशन के आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वकीलों विपुल सिंघवी और आदेश अरोड़ा ने दलील दी कि सर्विस लॉ के तहत सस्पेंशन सिर्फ एक अस्थायी और एहतियाती कदम होता है, ताकि यह पक्का हो सके कि आरोपी अधिकारी जांच को प्रभावित न करे।
उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी को साढ़े पांच साल से ज्यादा समय तक सस्पेंशन पर रखना असल में सजा देने जैसा है, जो सर्विस ज्यूरिस्प्रूडेंस के सिद्धांतों के खिलाफ है।
वकीलों ने दलील दी कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और राज्य सरकार ने केस चलाने की मंजूरी भी दे दी है।
इसलिए, अधिकारी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
यह मामला जनवरी 2021 का है और राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा है।
एसीबी के मुताबिक, एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़े प्रतिनिधियों ने शिकायत की थी कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य से जुड़ी रुकावटों को हटाने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे।
13 जनवरी, 2021 को एसीबी ने पिंकी मीणा को गिरफ्तार किया। उस समय वह बांदीकुई की एसडीएम के पद पर तैनात थीं। उन पर कथित तौर पर 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप था।
एक और अधिकारी, पुष्कर मित्तल, जो उस समय दौसा के एसडीएम थे, उनको कथित तौर पर 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
पिंकी मीणा की गिरफ्तारी ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं, क्योंकि यह उनकी शादी से कुछ ही दिन पहले हुई थी।
हाई कोर्ट ने तब उन्हें शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद, एसीबी ने अपनी जांच पूरी की, अदालत में चालान पेश किया और आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति राज्य सरकार से प्राप्त की।
–आईएएनएस
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