पीएम मोदी का 'सुभाषितम' संदेश : प्रयास और अडिग संकल्प बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी


नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रेरणादायी ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि अटूट धैर्य, निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प के बल पर बड़े से बड़े लक्ष्यों को भी सिद्ध किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।”

‘सुभाषितम’ संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर और क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेता है। श्लोक इस प्रकार है : ‘यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।’

इस श्लोक का अर्थ है, “जो व्यक्ति जिस लक्ष्य की इच्छा करता है और उसे पाने के लिए निरंतर क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वह बीच में हार मानकर अपने मार्ग से पीछे न हटे।”

इससे पहले, मंगलवार को ‘सुभाषितम’ संदेश में पीएम मोदी ने कहा था कि सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें। आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः। अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्‌।।”

इस श्लोक का अर्थ है, “आत्मा स्वभाव से सदा शुद्ध, नित्य, सुखस्वरूप और स्वयं प्रकाशमान है। किन्तु अज्ञान के कारण वह मलिन प्रतीत होती है और ज्ञान से वही पुनः अपने शुद्ध स्वरूप में प्रकट हो जाती है।”

–आईएएनएस

पीएसके/एएस


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