डोडा, 8 जून (आईएएनएस)। दो दिवसीय चौथे मेगा लैवेंडर महोत्सव का समापन रविवार को डोडा जिले के सरकारी डिग्री कॉलेज भदेरवाह में हुआ। इस महोत्सव में किसानों, छात्रों, वैज्ञानिकों, औद्योगिक भागीदारों, खरीदारों, विक्रेताओं और लैवेंडर एवं सुगंधित पौधों से जुड़े अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन दिवस पर सीएसआईआर- आईआईएम जम्मू के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
सीएसआईआर-आईआईएम के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने आईएएनएस को बताया कि ‘लैवेंडर गोज ग्लोबल’ थीम के तहत भदेरवाह में चौथा लैवेंडर महोत्सव 2026 संपन्न हुआ। महोत्सव में बैंगनी क्रांति की सफलता और अरोमा मिशन के माध्यम से 5,000 से अधिक किसानों और उद्यमियों को प्रदान किए गए समर्थन पर प्रकाश डाला गया।
डॉ. ज़बीर अहमद ने कहा, “हम किसानों और स्थानीय समुदायों को लैवेंडर की खेती से जोड़ने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। लगभग दस साल पहले, इस क्षेत्र में लैवेंडर की खेती बहुत छोटे पैमाने पर शुरू हुई थी, जिसमें केवल कुछ ही किसान शामिल थे। उस समय, कई किसान इसे जोखिम भरा काम मानते थे। आज स्थिति में काफी बदलाव आया है। 5,000 से अधिक किसान लैवेंडर की खेती में शामिल हो गए हैं, जो फसल और इसकी आर्थिक क्षमता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। लैवेंडर खेती में किसानों की कामयाबी मिलने के कारण इस क्षेत्र में हर साल हम लैवेंडर महोत्सव मनाते हैं। महोत्सव में छात्र, किसान, वैज्ञानिक और उद्योगपति आते हैं।”
डॉ. अहमद ने कहा, “अभी तक हमने तीन चरण अरोरमा मिशन पूरे किए हैं। हमने थर्ड पार्टी एनालिसिस कराया, जिसकी रिपोर्ट बताती ही कि अभी तक भदेवरा क्षेत्र में 4 किलो तेल इस क्षेत्र में उत्पादन हुआ है। लैवेंडर तेल उत्पादन के संबंध में हम किसानों को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हमने उन्हें आसवन सुविधाओं और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों में सहायता प्रदान की है ताकि उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन सुनिश्चित हो सके। अगला महत्वपूर्ण कदम बाजार और उद्योग संबंधों को मजबूत करना है। किसानों को उचित आसवन तकनीकों, मूल्यवर्धन, उत्पाद विकास और विपणन रणनीतियों पर प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है। हमने इन सभी पहलुओं के लिए प्रावधान किए हैं।”
सीएसआईआर-आईआईएम के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि लैवेंडर की खेती का सही समय जून होता है। अक्टूबर इस खेती के लिए अनुकूल नहीं है।
–आईएएनएस
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