चेन्नई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार पलानी मंदिर की भूमि पर कथित अतिक्रमण और नागरकोइल में विचाराधीन कैदी की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को संरक्षण नहीं देगी। ऊर्जा और कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने गुरुवार को यह बात कही और जोर देकर कहा कि दोनों मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार पलानी स्थित अरुलमिगु धनदायुथपानी स्वामी मंदिर की भूमि पर कथित अतिक्रमण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस मामले के पीछे प्रभावशाली ‘सत्ता केंद्रों’ का हाथ है और कहा कि जांच बिना किसी हस्तक्षेप के आगे बढ़ेगी।
निर्मलकुमार ने कहा कि सरकार मंदिर की संपत्तियों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून अपना काम करेगा, चाहे इसमें शामिल लोगों का रुतबा या प्रभाव कुछ भी हो।
नागरकोइल उप-जेल में विचाराधीन कैदी सबरीवर्मन की हिरासत में हुई मौत के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को तत्काल और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं।
उन्होंने दोहराया कि सरकार का इस घटना से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बचाने का कोई इरादा नहीं है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रशासन हिरासत में हुई मौतों के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और आरोप लगाया कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान ऐसी कई घटनाएं हुईं, लेकिन सच्चाई पूरी तरह से सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा कि टीवीके सरकार पारदर्शिता बनाए रखने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
राजनीति की ओर मुड़ते हुए निर्मलकुमार ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों पर भाजपा के साथ गठबंधन करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार को अस्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत विधायकों को 50 करोड़ रुपए के प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
पंजीकरण विभाग में सुधारों के संबंध में मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व डीएमके शासन के दौरान दस्तावेज पंजीकरण में निश्चित प्रतिशत शुल्क वसूला जाता था।
–आईएएनएस
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