नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इसमें 20 जुलाई को संसद तक छात्रों के मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन में 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा के महासचिव को संबोधित अपने नोटिस में तिवारी ने सदन से निर्धारित कार्यवाही स्थगित करने और इस मुद्दे को अत्यावश्यक जनहित का मामला मानते हुए इस पर विचार करने का आग्रह किया।
कांग्रेस नेता ने नोटिस में कहा, “मैं सदन की कार्यवाही स्थगित करने के लिए एक प्रस्ताव लाने की अनुमति का अनुरोध करता, ताकि एक अत्यावश्यक मामले पर चर्चा की जा सके।”
तत्काल संसदीय हस्तक्षेप की मांग करते हुए तिवारी ने प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य सूचीबद्ध कार्यवाहियों को स्थगित करने का आह्वान किया ताकि इस घटना पर व्यापक बहस हो सके।
उन्होंने कहा, “मैं प्रस्ताव रखता हूं कि यह सदन प्रश्न काल, शून्य काल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कामकाज को स्थगित करे ताकि 20 जुलाई, 2026 को संसद तक मार्च के दौरान निहत्थे छात्र प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर चर्चा की जा सके, जिसमें 80 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कम से कम बल का प्रयोग किया जाना चाहिए था, फिर भी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजा देने के मुद्दे पर तत्काल संसदीय चर्चा जरूरी हो गई है।”
उन्होंने सरकार से आज का कामकाज स्थगित करने और राष्ट्रीय महत्व के इस मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए समय देने की अपील की।
उन्होंने कहा, “मैं सरकार से आज का कामकाज स्थगित करने और इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर पूरी चर्चा की अनुमति देने का आग्रह करता हूं।”
इस बीच, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा राजधानी में हुए व्यापक आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की आंतरिक जांच चल रही है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम से अगले सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है।
–आईएएनएस
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