शुभांशु ने कहा- अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बल नहीं था। इस कारण हार्ट खून को ऊपर की तरफ पंप कर रहा था। इससे खून सिर की तरफ आकर एकत्र हो रहा था, जिससे सिर में सूजन बढ़ती जा रही थी।। हार्ट सिकुड़ रहा था, मसल्स मास कम हो रहा था। इतना ही नहीं, उनकी लंबाई भी 5 सेंटीमीटर तक बढ़ गई थी। धरती पर लौटने के 15 दिन बाद मेरा शरीर सामान्य हुआ।इंडियन एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा का एक और राज खोला है। उन्होंने उस दौरान अपने शरीर में हुए बदलावों के बारे में बताया है। कहा कि वहां उनकी 5 सेमी बढ़ी थी और सिर में सूजन हो गई थी। उन्होंने गुरुवार को लखनऊ में एनबीआरआई में आयोजित ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव में यह बताया।
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने पर बेहद खूबसूरत लगती है। यहां जो कुछ भी है वह अनमोल ही नहीं बल्कि अत्यंत दुर्लभ है। इसीलिए पृथ्वी पूरे ब्रह्मांड में सबसे अनमोल है। यहां मिलने वाली लकड़ी पूरे अंतरिक्ष में कहीं और नहीं मिलेगी। वह यहीं मिलेगी यानी की लकड़ी भी दूसरे ग्रहों के लिए हीरे जितनी अनमोल है।
पृथ्वी की सुंदरता और उस पर जीवन की बहुमूल्यता के लिए इसे संरक्षित करना बहुत जरूरी है, यहां बढ़ रहे प्रदूषण को रोकना जरूरी है। यह तभी संभव है जब इसके लिए वैश्विक दृष्टिकोण अपनाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि पृथ्वी संरक्षण के लिए
दुनिया में सिर्फ भारत के संविधान में खूबी
शुभांशु ने बताया कि भारत का संविधान दुनिया का इकलौता ऐसा संविधान है जो अपने नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने को मौलिक कर्तव्य मानता है। अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर माइक्रोग्रेविटी में सायनोबैक्टीरिया और शैवाल पर किए गए प्रयोगों का जिक्र किया। कई रोचक घटनाएं भी सुनाईं।
सोच की रफ्तार से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा भारत
इस दौरान शुभांशु ने कहा कि स्पेस साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया की अपेक्षाओं से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही देश का अपना स्पेस स्टेशन भी अंतरिक्ष में स्थापित होगा। उम्मीद है कि 2035 तक हम उस स्टेशन पर इंडिपेंडेंट तरीके से काम कर सकेंगे।
