अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एनिमेशन सेंटर में लगी भीषण आग ने एक बार फिर राजधानी में अग्निसुरक्षा इंतजामों की कलई खोल दी है। बड़े अग्निकांड के बाद विभाग संबंधित को नोटिस देता है। जांच के लिए कमेटी बनाता, कागजों में जांच होती। इसके कुछ दिन बाद ही मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। न ही किसी को जांच में दोषी पाया जाता है। इसी तरह की अनदेखी का नतीजा अलीगंज एनिमेशन सेंटर का अग्निकांड है। इस मामले में भी यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।राजधानी में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक इमारतों में आग लगने की घटनाएं नई नहीं हैं। इसके बावजूद अग्निशमन विभाग स्थायी और प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। विभागीय अधिकारियों की सक्रियता अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही दिखाई देती है। जांच और नोटिसों की औपचारिकता पूरी होने के बाद न तो भवन सील किए जाते हैं और न ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होती है।
विभाग के पास संसाधन का टोटा
मानकों के अनुसार राजधानी में 41 फायर टेंडरों की जरूरत है, लेकिन विभाग के पास सिर्फ 16 वाहन उपलब्ध हैं। चालकों की संख्या 22 है, जबकि आवश्यकता 44 की बताई जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर फायरमैन ही वाहन चलाने को मजबूर हैं। फायरमैन के स्वीकृत पदों के मुकाबले भी बड़ी कमी बनी हुई है। जहां लगभग 310 कर्मियों की जरूरत है, वहां केवल 210 फायरमैन तैनात हैं।
कोचिंग संस्थानों में आग की प्रमुख घटनाएं
– 12 सितंबर 2024 : जानकीपुरम क्षेत्र के एक कोचिंग सेंटर में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में फायर सेफ्टी जांच का अभियान चलाया गया था।
