हैदराबाद, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता प्रस्तावित नई राजनीतिक पार्टी के लॉन्च से पहले धार्मिक आस्था के तहत वाराणसी के लिए रवाना हुईं। वह उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। इसे उनके राजनीतिक सफर के एक अहम चरण से पहले आध्यात्मिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
रवाना होने से पहले हैदराबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए कविता ने महिला आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व लगभग 3.13 प्रतिशत है और परिसीमन के बाद भी यही प्रतिशत राज्य के लिए आधार रेखा (बेसलाइन) होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि यह हिस्सा कम किया जाता है तो राज्य के लोगों में असंतोष बढ़ेगा और वे विरोध के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं।
कविता ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के मॉडल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहली नजर में यह प्रस्ताव उचित लगता है लेकिन जब अन्य राज्यों के मुकाबले तेलंगाना को मिलने वाली हिस्सेदारी का आकलन किया जाता है, तो अंतर काफी बड़ा नजर आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ किसी भी प्रकार का असंतुलन स्वीकार्य नहीं होगा और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने के मुद्दे पर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया। कविता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार दोनों मुद्दों को आपस में जोड़ रही है, जबकि महिला आरक्षण को स्वतंत्र रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जोड़ा जाए ताकि महिलाओं के भीतर भी सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
कविता ने महिला आरक्षण में पिछड़ा वर्ग आरक्षण महिलाओं के लिए उप-कोटा की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण के भीतर पिछड़ा वर्ग आरक्षण महिलाओं को उनका उचित हिस्सा मिलना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति में इन विधेयकों को लेकर भ्रम बना हुआ है लेकिन सरकार को स्पष्ट नीति बनाते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चाहिए।
–आईएएनएस
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