टोक्यो, 3 मई (आईएएनएस)। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने एक बार फिर देश के 1947 के संविधान में संशोधन करने का संकेत दिया है। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी।
क्योडो न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संविधान दिवस (3 मई) के मौके पर संशोधन समर्थकों की एक बैठक के लिए भेजे गए वीडियो संदेश में ताकाइची ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी डाइट (संसद) में चर्चा को आगे बढ़ाएगी, ताकि अन्य दलों के सहयोग के साथ मिलकर फैसले लिए जा सकें। उन्होंने यह भी वादा किया कि प्रस्तावित संशोधनों को जनता को ध्यान से समझाया जाएगा।
जापान का मौजूदा संविधान 1947 में लागू हुआ था। इसे अक्सर शांतिवादी संविधान कहा जाता है, क्योंकि इसके अनुच्छेद-9 में युद्ध को देश के अधिकार के रूप में त्याग दिया गया है और जापान को ‘युद्ध करने की क्षमता’ रखने से रोका गया है।
ताकाइची ने कहा कि इसे समय की जरूरतों के अनुसार समय-समय पर अपडेट किया जाना चाहिए जो देश की नींव का काम करता है। ताकाइची पहली बार इस तरह के बदलावों को आगे बढ़ा रही हैं, जबकि यह संविधान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लागू हुआ था।
उन्होंने कहा कि चर्चा सिर्फ चर्चा के लिए नहीं होनी चाहिए। लोगों के भरोसे को पूरा करने के लिए नेताओं को फैसले लेने के मकसद से चर्चा करनी चाहिए।
संविधान में बदलाव के संकेतों को पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा है। फरवरी में टोक्यो में लोगों ने प्रधानमंत्री के संविधान संशोधन के प्रयास के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ‘संविधान संशोधन नहीं चाहिए’ और ‘शांति की रक्षा करो’ जैसे नारे लगाए और अपनी असहमति जताई थी।
पिछले महीने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के सम्मेलन में ताकाइची ने कहा था कि हम चाहते हैं कि अगले साल के सम्मेलन तक संविधान संशोधन का एक प्रस्ताव सामने हो और अब समय आ गया है कि संविधान में सुधार किया जाए।
अक्टूबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची, इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। उन्हें फरवरी 2026 में फिर से चुना गया।
–आईएएनएस
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