नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। एक बयान जारी कर इसे दुर्भावना से प्रेरित और वादाखिलाफी करार दिया है। इस बयान की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी चस्पा की गई है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि होर्मोजगन प्रांत में अमेरिका की आक्रामक कार्रवाई उनकी ‘दुर्भावना और वादाखिलाफी’ को दिखाती है। ईरान ने दावा किया कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में हिचकेगा नहीं।
बयान में लिखा है, अमेरिकी सेना ने पिछले 48 घंटों में ईरानी व्यापारिक जहाजों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, वो सीजफायर नियमों का सीधा-सीधा उल्लंघन है।
इसमें आगे शांति प्रयासों की चर्चा करते हुए वादाखिलाफी का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में जारी कूटनीतिक प्रक्रिया के समानांतर किए गए ये आक्रामक कदम एक बार फिर अमेरिकी शासन की दुर्भावना और वादाखिलाफी को पूरी दुनिया के सामने उजागर करते हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इससे यह भी साबित होता है कि “ईरानी राष्ट्र का मैदान, जनआंदोलन और कूटनीति तीनों मोर्चों पर अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास पूरी तरह तर्कसंगत है और ईरानी जनता के खिलाफ उसके गलत व्यवहार पर आधारित है।”
ईरान ने दोहराया कि उनका देश इन आक्रामक कार्रवाइयों की सख्त शब्दों में निंदा करता है; ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है। तेहरान इस कार्रवाई का मुकम्मल जवाब देगा।
26 मई की सुबह ही अमेरिका की ओर से होर्मुज पर अटैक किया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के मुताबिक यह कार्रवाई सेल्फ-डिफेंस (आत्मरक्षा) में की गई। सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को खतरे से बचाने के लिए ये हमले किए गए। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स को निशाना बनाया। इसके अलावा बंदर अब्बास पोर्ट के पास सरफेस टू एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया।
हमले के बाद ईरान की सेना ने कहा कि अगर उस पर फिर हमला हुआ, तो वह पहले से ज्यादा बड़ा और कड़ा जवाब देगा। सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेखरची ने कहा कि अगली बार ईरान की कार्रवाई सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। अगर फिर युद्ध जैसी स्थिति बनी, तो जवाब पहले से ज्यादा बड़ा और हिंसक होगा।
–आईएएनएस
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