आठ साल पहले कोर्ट के फर्जी आदेश का इस्तेमाल कर जेल से छूटा कैदी, मामले की जांच जारी


बेंगलुरु, 24 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक जेल से धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अधिकारियों को पता चला है कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने करीब 8 साल पहले बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से अपनी रिहाई करवा ली थी। अपनी रिहाई के लिए कैैदी ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।

इस घटना ने जेल विभाग के भीतर गंभीर चिंता पैदा कर दी है और संभावित मिलीभगत, लापरवाही और प्रक्रियागत चूकों की जांच शुरू करने पर मजबूर कर दिया है, जिनके कारण दोषी की रिहाई संभव हो पाई होगी। दोषी, जिसकी पहचान शंकर अरमुगम के रूप में हुई है, 2001 के फिरौती के लिए अपहरण के एक मामले के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि 13 नवंबर 2018 को उसे जेल से रिहा कर दिया गया था। रिहाई के समय उसने कुछ दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें कथित तौर पर यह दिखाया गया था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। रिहाई के समय, जेल अधिकारियों ने कथित तौर पर उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की और अदालत के कथित आदेश में बताए गए 10 हजार रुपए का जुर्माना चुकाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया।

यह मामला हाल ही में तब सामने आया, जब जेल महानिदेशक को एक शिकायत मिली। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शंकर ने सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश पेश करके धोखाधड़ी से अपनी रिहाई करवा ली थी। इस शिकायत के बाद, जेल अधिकारियों ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की।

जांच के दौरान, अधिकारियों ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार के कार्यालय से संपर्क किया।

बाद में अधिकारियों को पता चला कि दोषी द्वारा पेश किया गया आदेश कथित तौर पर जाली था और उसका सर्वोच्च न्यायालय से आधिकारिक तौर पर कोई संबंध नहीं था।

जेल अधिकारियों के अनुसार, शंकर अरमुगम को बेंगलुरु की फास्ट ट्रैक कोर्ट-I ने आईपीसी की धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण करने और धारा 120बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी ठहराया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

इस मामले ने सवाल खड़े किए हैं कि नकली कानूनी दस्तावेज बिना पता चले जेल के सरकारी प्रोसेस से कैसे गुजर गए। क्या जेल सिस्टम के अंदर किसी ने इस धोखाधड़ी में मदद की या इसे नजरअंदाज किया।

जांच के नतीजों के आधार पर, परप्पना अग्रहारा पुलिस ने जालसाजी, नकली दस्तावेज बनाने और इस्तेमाल करने, और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

अधिकारियों ने बताया कि दोषी का पता लगाने और उसे दोबारा गिरफ्तार करने के प्रयास फिलहाल जारी हैं। जांचकर्ता उन लोगों की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रहे हैं, जिन्होंने जाली दस्तावेज तैयार करने और जेल से उसकी अवैध रिहाई में मदद की हो सकती है। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

जेल विभाग के डीजीपी आलोक कुमार ने कहा, “अब परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी शंकर अरुमुगम द्वारा धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी के मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह एफआईआर लगभग आठ साल बाद दर्ज की गई है, जो मेरे दफ्तर में मिले एक गुमनाम पत्र पर आधारित है। इस संबंध में डीआईजी (दक्षिण) द्वारा एक जाँच की गई थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही यह एफआईआर दर्ज की गई है।”

–आईएएनएस

पीएसके


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