2011 में भारत की विश्व कप की जीत ने मेरे अंदर देश के लिए खेलने का सपना जगाया: शेडगे


नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। सूर्यांश शेडगे ने बताया कि 2011 में भारत की विश्व कप जीत ने उनके अंदर देश के लिए खेलने का सपना जगाया। उन्होंने कहा कि भारत की जीत देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उसी पल उन्होंने तय कर लिया था कि वह एक दिन भारत के लिए खेलेंगे और सबसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी के चोटिल होने के बाद सूर्यांश शेडगे को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने रविवार को स्टॉर्मोंट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब मैदान पर आयरलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में भारत के लिए डेब्यू किया।

भारतीय टीम में चयन के बाद अपनी यात्रा पर बात करते हुए सूर्यांश शेडगे ने उस पल को याद किया, जिसने उनके अंदर देश के लिए खेलने का सपना जगाया। उन्होंने बताया कि 2011 में भारत की विश्व कप जीत ने उन पर गहरा असर डाला और तभी उन्होंने एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करने का संकल्प लिया।

शेडगे ने कहा, “क्रिकेट देखते हुए मैं पहली बार तब रोया था, जब भारत ने 2011 का विश्व कप जीता था। उस रात भारतीय टीम को ट्रॉफी उठाते देखकर मेरे अंदर कुछ बदल गया। तभी मैंने तय कर लिया कि मुझे भी एक दिन सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उसी दिन से मैंने इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत शुरू कर दी।”

शेडगे ने जियोस्टार से कहा, “मुझे पता था कि यह सफर आसान नहीं होगा, लेकिन मैं इसके लिए पूरी मेहनत करने को तैयार था। जब पहली बार मैंने भारतीय टीम की जर्सी पहनी, तो उस एहसास को शब्दों में बयां करना मुश्किल था। सुबह जल्दी उठना, कड़ी मेहनत करना और कई त्याग करना, उस पल सब कुछ सफल लगा। बचपन से मैंने इसी दिन का सपना देखा था। भारतीय जर्सी पहनना मेरे लिए सिर्फ सपना पूरा होने जैसा नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।”

उन्होंने अपने चयन की आधिकारिक घोषणा होने के बाद प्राप्त हुई पहली बधाई कॉलों में से एक को भी याद किया और बताया कैसे उनकी बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के साथ भावनात्मक बातचीत हुई थी।

शेडगे ने कहा, “जब मेरा भारतीय टीम में चयन हुआ, तो अर्शदीप सिंह पाजी ने मुझे वीडियो कॉल किया। उन्होंने मुझे बधाई दी और अपने चयन का अनुभव भी साझा किया। हमने कुछ देर बात की। वह पल मेरे लिए बेहद भावुक था। उस समय मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मेरा सपना सच हो गया है। आज भी यह किसी सपने जैसा लगता है।”

शेडगे ने कप्तान श्रेयस अय्यर के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला और बताया कि उनकी बातचीत मैच के दिनों से कहीं आगे तक चलती है और अक्सर खेल के विभिन्न पहलुओं को समझने के इर्द-गिर्द घूमती है।

उन्होंने कहा, “मैं श्रेयस अय्यर भाई से अक्सर बात करता हूं। मैदान के बाहर भी हम काफी समय साथ बिताते हैं। हमारी बातचीत ज्यादातर क्रिकेट, बल्लेबाजी, गेंदबाजी, मैच की परिस्थितियों और दबाव से निपटने के तरीकों पर होती है। आईपीएल के दौरान भी हम साथ बैठकर दूसरे मैच देखते थे और चर्चा करते थे कि ऐसी स्थिति में हम क्या करते। इन बातों से मुझे उनके अनुभव से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।”

बातचीत के दौरान, शेडगे ने किशोर सनसनी वैभव सूर्यवंशी की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि इस युवा खिलाड़ी का आत्मविश्वास और मानसिक रूप से स्वतंत्र रहने की क्षमता उसे दूसरों से अलग करती है।

शेडगे ने कहा, “श्रेयस अय्यर की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिकता है। उन्हें बल्लेबाजी करना बेहद पसंद है और वह चीजों को कभी मुश्किल नहीं बनाते। उन्हें अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है। अगर वह किसी मैच में शून्य पर आउट भी हो जाएं, तो उसका असर अगले मैच पर नहीं पड़ने देते। उन्हें विश्वास रहता है कि अगले मैच में वह शानदार प्रदर्शन करेंगे। ऐसा आत्मविश्वास बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। वह न तो पिछली गेंद के बारे में सोचते हैं और न ही पिछले मैच की चिंता करते हैं। वह हर मैच में पूरी आजादी और निडर होकर खेलते हैं। यही बात उन्हें इतना खतरनाक बल्लेबाज बनाती है।”

–आईएएनएस

एसएचके/एएस


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