नई दिल्ली, 1 जुलाई (केसरिया न्यूज़)। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) ने बुधवार को बताया कि जून 2026 में उसकी कुल ऑटो बिक्री 1,06,207 वाहनों की रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है। इस आंकड़े में घरेलू बिक्री के साथ-साथ निर्यात भी शामिल है।
कंपनी के अनुसार, जून में घरेलू बाजार में यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की बिक्री 60,393 यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है। वहीं, निर्यात सहित कुल यूटिलिटी व्हीकल बिक्री 61,504 यूनिट दर्ज की गई।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ नलिनीकांत गोल्लागुंटा ने कहा कि जून में कंपनी ने 60,393 एसयूवी और 3.5 टन से कम क्षमता वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल (एलसीवी) की 26,076 यूनिट बेचीं, जिनमें क्रमशः 28 प्रतिशत और 35 प्रतिशत की मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
कंपनी ने बताया कि जून में कुल 5,918 वाहनों का निर्यात किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 125 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाता है। वहीं, कुल लाइट कमर्शियल व्हीकल (एलसीवी) बिक्री 39,896 यूनिट रही।
एलसीवी सेगमेंट में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। 2 टन से कम क्षमता वाले एलसीवी की बिक्री 3,508 यूनिट रही, जिसमें 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं 2 टन से 3.5 टन क्षमता वाले एलसीवी की बिक्री 22,568 यूनिट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी के तीन पहिया वाहन (थ्री-व्हीलर) कारोबार में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
जून 2026 में इस श्रेणी में 13,820 यूनिट की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 8,454 यूनिट था। इस तरह थ्री-व्हीलर बिक्री में 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस (एफईबी) ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। जून 2026 में कंपनी ने घरेलू बाजार में 58,177 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री जून 2026 में 59,935 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 53,392 यूनिट थी। वहीं, जून महीने में 1,758 ट्रैक्टरों का निर्यात किया गया।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नाकरा ने कहा कि अल नीनो की संभावित स्थिति का पूरा असर आंकना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि सरकार की ओर से उर्वरक सब्सिडी जारी रखने और किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर लक्षित सहायता जैसे कदमों से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और इसका खरीफ सीजन पर पड़ने वाला प्रभाव भी सीमित रहने की उम्मीद है।
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