गलतियों से सीखने और खुद को समझने की कहानी है 'हीर सारा और पॉण्डिचेरी’: मानवी गगरू


मुंबई, 19 मई (आईएएनएस)। अभिनेत्री मानवी गगरू इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘हीर सारा और पॉण्डिचेरी’ को लेकर चर्चा में हैं। वह फिल्म में ‘हीर’ नाम की ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो निडर है, जिद्दी है और जिंदगी को अपने नजरिए से देखती है। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में मानवी ने फिल्म और अपने किरदार को लेकर खुलकर बात की।

फिल्म का निर्देशन कार्तिक चौधरी ने किया है। कहानी दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बाइक पर पॉण्डिचेरी के सफर पर निकलती हैं। यह सफर खुद को समझने, अपने डर से बाहर निकलने और जिंदगी को नए तरीके से देखने में मदद करता है। फिल्म में दोस्ती, आजादी और भावनात्मक जुड़ाव को अलग अंदाज में दिखाया गया है।

आईएएनएस से फिल्म की कहानी के बारे में बात करते हुए मानवी गगरू ने कहा, ”जब मैंने पहली बार इसकी स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कोई किताब पढ़ रही हूं। फिल्म के डायलॉग्स मजेदार होने के साथ-साथ भावुक भी हैं। कहानी में ऐसे कई पल हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। यही बात मुझे फिल्म की ओर सबसे ज्यादा खींचकर ले गई।”

मानवी ने कहा, ”हीर एक ऐसी लड़की है, जो जिंदगी को खुलकर जीती है। वह बिना ज्यादा सोचे वही करती है जो उसका दिल कहता है। हीर के अंदर एक अलग तरह की आजादी है। उसे पता है कि उसे क्या चाहिए और वह उसे पाने से डरती नहीं है। वह कई बार बिना नतीजों के बारे में सोचे फैसले लेती है, लेकिन फिर भी उसे अच्छी तरह समझ होता है कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत।”

मानवी ने कहा, ”हीर बेहद जिद्दी और खुशमिजाज लड़की है। वह दुनिया को हमेशा अच्छे नजरिए से देखती है और हर स्थिति में कुछ अच्छा ढूंढने की कोशिश करती है। हीर अपने आप में पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी हुई है और खुद को लेकर सहज रहती है। यही बात मुझे इस किरदार में सबसे ज्यादा पसंद आई। आज के समय में ऐसे किरदार कम देखने को मिलते हैं, जो अपनी कमजोरियों और गलतियों के बावजूद खुद से प्यार करना जानते है।”

फिल्म में महिलाओं पर समाज की तरफ से डाले जाने वाले दबाव और उम्मीदों को भी दिखाया गया है। इस बारे में बात करते हुए मानवी ने कहा, ”मैं चाहती हूं कि यह फिल्म महिलाओं और लड़कियों को अकेले यात्रा करने और दुनिया को अपने नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करे। यात्रा इंसान को भीतर से बदल देती है और सोच को बड़ा बनाती है।”

अभिनेत्री ने कहा, ”बहुत सी महिलाएं अपनी पूरी जिंदगी में कभी अकेले घूमने का अनुभव नहीं ले पातीं। अकेले सफर करने से इंसान को आजादी महसूस होती है। गलतियां करने, उनसे सीखने और फिर खुद को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलता है। दर्शक इस फिल्म से यही भावना लेकर बाहर निकलें कि जिंदगी को खुलकर जीना जरूरी है।”

–आईएएनएस

पीके/वीसी


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