पीओके में बढ़ता जनाक्रोश, इस्लामाबाद के हस्तक्षेप के खिलाफ गहराया असंतोष: रिपोर्ट

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इस्लामाबाद, 20 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में महंगाई, राजनीतिक अधिकारों की कमी और शासन व्यवस्था को लेकर जनता का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में इस्लामाबाद के बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ लोगों में गहरी नाराजगी है और यही असंतोष अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

ऑनलाइन पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस महीने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने क्षेत्र में लंबे समय से पनप रहे जनाक्रोश को उजागर कर दिया है। शासन सुधार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई, जिससे इस्लामाबाद के सामने राजनीतिक संकट खड़ा हो गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी आलोचना हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी घरेलू चुनौती बन गई है, जिसे कूटनीतिक प्रयासों या शांति समर्थक छवि पेश करके छिपाया नहीं जा सकता।

5 जून को अधिकारियों ने 27 जुलाई को चुनाव कराने की घोषणा की। इसी के साथ वकीलों, व्यापारियों, परिवहन कर्मियों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर आतंकवाद में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनावों की घोषणा और जेएएसी पर प्रतिबंध एक साथ किया जाना महज संयोग नहीं माना जा सकता। आशंका जताई गई है कि चुनावों के विरोध में संभावित आंदोलन को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने, इस्लामाबाद और विशेष रूप से पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था के निर्देश पर, क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली जनआंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की।

जेएएसी ने प्रतिबंध, चुनावी घोषणा और आरक्षित सीटों को बरकरार रखने संबंधी न्यायिक फैसले के विरोध में 9 जून को ‘व्हील-जाम हड़ताल’ का आह्वान किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरक्षित सीटों का मुद्दा मौजूदा अशांति का केवल एक कारण है। पिछले दो वर्षों से बढ़ती महंगाई भी विरोध प्रदर्शनों की बड़ी वजह रही है। जेएएसी लगातार बढ़ती जीवन-यापन लागत को लेकर जनता की नाराजगी को आंदोलन का आधार बनाता रहा है।

विशेष रूप से बिजली की ऊंची कीमतें लोगों के लिए संवेदनशील मुद्दा बनी हुई हैं। क्षेत्र में विशाल जलविद्युत संसाधन होने के बावजूद स्थानीय लोगों का मानना है कि उन्हें इन संसाधनों का उचित लाभ नहीं मिल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पीओके का मौजूदा संकट इस्लामाबाद के शासन मॉडल की सीमाओं और क्षेत्र में उसके कमजोर होते सामाजिक अनुबंध को उजागर करता है। चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों के साथ ईंधन और गेहूं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने लोगों में यह धारणा मजबूत की है कि संघीय सरकार के अधीन रहने से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तानी प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक विरोध देखने को मिला। विशेष रूप से कश्मीरी प्रवासी समुदाय के हजारों लोगों ने लंदन की सड़कों पर मार्च निकालकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।

–आईएएनएस

डीएससी

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