यूएस-ईरान समझौते को लेकर तेहरान-फ्रांस के बीच फोन पर बात, जर्मन विदेश मंत्री ने रूबियो से की मुलाकात


नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। यूएस-ईरान समझौते को लेकर विश्व भर में हलचल तेज है। हाल ही शांति वार्ता के बाद दोबारा हमले और फिर दोनों ओर से हमलों को रोकने के लिए हुए राजीनामे के बाद मंगलवार को ईरान और फ्रांस के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बात की, वहीं जर्मन विदेश मंत्री ने अमेरिका में रूबियो से मुलाकात की।

ईरानी मीडिया आईआरआईबी के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने अमेरिका-ईरान समझौता (एमओयू) और उसे लागू करने को लेकर फोन पर बातचीत की। ईरान ने कहा, “इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका और इजरायल की ओर से उस पर थोपे गए युद्ध को समाप्त करना है।”

दरअसल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि फ्रांस और ओमान मिलकर होर्मुज को जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने पर काम कर रहे हैं। इसके तहत समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगें हटाने की भी तैयारी है। इस पर ईरान ने सख्त ऐतराज जताया था।

मैक्रों के इस बयान पर ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा, “होर्मुज में समुद्र से बारूदी सुरंगें हटाने का काम सिर्फ ईरान करेगा। किसी दूसरे देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।”

वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि यह समझौता मौजूदा हालात में कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वाडेफुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “यह समझौता बेहद नाजुक हालात में कूटनीति के लिए अवसर पैदा करता है। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐसा स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही बनी रहे।”

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी दीर्घकालिक समाधान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का प्रभावी समाधान शामिल होना चाहिए। उनके अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम भविष्य में कभी भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बने।

–आईएएनएस

केआर/


Related Articles

Latest News