हाल ही में शुरू हुए 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे से पूरे उत्तर प्रदेश में माल ढुलाई का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इससे सालाना लॉजिस्टिक्स पर 30,000 करोड़ रुपये तक की बचत होगी और एक दर्जन से ज़्यादा ज़िलों में औद्योगिक और भंडार गृह सुविधाओं के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकारी अनुमानों और उद्योग जगत के जानकारों से यह जानकारी मिली है। यह छह-लेन वाला एक्सप्रेसवे (जिसे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है) 12 ज़िलों से होते हुए मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। इसे पश्चिमी और पूर्वी उप्र को जोड़ने वाले एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गलियारे के तौर पर देखा जा रहा है। उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अभी सालाना लगभग 24.5-26 करोड़ टन माल की ढुलाई राज्य के भीतर ही होती है। इसमें मुख्य रूप से अनाज, निर्माण सामग्री और खुदरा सामान शामिल होता है। वहीं, राज्य से बाहर जाने वाले माल की मात्रा 13.5-15. करोड़ टन होने का अनुमान है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा और कृषि उत्पाद प्रमुख हैं। राज्य के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन और रोज़गार सृजन को गति देकर राज्य की अर्थव्यवस्था में “एक नया अध्याय” लिखेगा।
गुप्ता ने बताया कि इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में किया था। इसके शुरू होने से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय लगभग 10-12 घंटे से घटकर लगभग 5-8 घंटे रह गया है। मंत्री ने कहा, “यह एक्सप्रेसवे सिर्फ़ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि एक एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गलियारा है। माल की तेज़ आवाजाही और परिवहन लागत में कमी से सालाना लॉजिस्टिक्स पर 25,000-30,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।”
उन्होंने बताया कि इस गलियारे के किनारे राज्य को पहले ही लगभग 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इसके तहत 6,507 एकड़ ज़मीन पर 12 औद्योगिक केंद्र (नोड्स) विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, भंडार गृह और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों को इससे फ़ायदा होने की उम्मीद है।
साथ ही, प्रस्तावित फ़ार्मा, कपड़ा और आईटी पार्क बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा कर सकते हैं। ब्लू डार्ट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी दिपांजन बनर्जी ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे पारंपरिक रूटिंग हब पर निर्भरता कम करके उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स परिचालन को पूरी तरह से बदल देगा। उन्होंने बताया, “जो कड़ी गायब थी, वह एक ऐसा निर्बाध उत्तरी गलियारा था जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर बेल्ट) को सीधे पूर्वी ज़िलों से जोड़ता। गंगा एक्सप्रेसवे इस कमी को प्रभावी ढंग से पूरा करता है।”
बनर्जी ने कहा कि बढ़ती खपत, औद्योगिक क्लस्टर और दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में तेज़ी से हो रही वृद्धि के कारण यह राज्य एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स बाज़ार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि ई-कॉमर्स, फार्मास्युटिकल्स, कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को माल की तेज़ और अधिक अनुमानित आवाजाही से विशेष रूप से लाभ होगा।
ट्राइटन लॉजिस्टिक्स एंड मैरीटाइम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे आपूर्ति श्रृंखला के ‘अनुमान’ में सुधार करेगा और हवाई कार्गो तथा माल ढुलाई गलियारे के साथ संबंधों को मज़बूत करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तरी क्षेत्र में वर्तमान में भारत की कुल हवाई माल ढुलाई का लगभग 31.3 प्रतिशत हिस्सा आता है, और यह एक्सप्रेसवे हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों की ओर माल की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, “यह गलियारा खराब होने वाली वस्तुओं, कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स की आवाजाही में सुधार करेगा, और उत्तर प्रदेश की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।” मंत्री गुप्ता के अनुसार, इस परियोजना से लंबे समय में राज्य की अर्थव्यवस्था में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान होने की उम्मीद है, और यह प्रदेश के एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का समर्थन करेगा।
भविष्य में इस एक्सप्रेसवे का और विस्तार किया जाएगा ताकि इसे उत्तराखंड से जोड़ा जा सके। 29 अप्रैल को इस परियोजना के उद्घाटन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे-जिसकी आधारशिला दिसंबर, 2021 में रखी गई थी-पांच साल से भी कम समय में बनकर तैयार हो गया है और यह देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे में से एक है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इसके विस्तार का काम भी शुरू हो चुका है और जल्द ही यह एक्सप्रेसवे मेरठ से आगे हरिद्वार तक बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, प्रस्तावित फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के ज़रिये इसे अन्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा।
