लखनऊ, 30 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने जून के बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ‘ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार’ (एफपीपीएएस) लगाने की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस कदम से राज्यभर में सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा।
यह सरचार्ज, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, बिजली खरीदने और ट्रांसमिशन लागत पर हुए अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए लगाया गया है।
29 मई को जारी एक आदेश के अनुसार, मार्च महीने से जुड़ा 10 प्रतिशत का यह इजाफा जून में जारी होने वाले बिजली के बिलों के जरिए वसूला जाएगा। इस फ़ैसले का मतलब है कि उपभोक्ताओं को ‘फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (ईंधन सरचार्ज समायोजन तंत्र) के तहत अपने मासिक बिजली बिलों पर अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज’ (ईंधन और बिजली खरीद समायोजन सरचार्ज) इसलिए लगाया जाता है, ताकि वितरण कंपनियों को ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और अलग-अलग स्रोतों से बिजली खरीदने की बढ़ी हुई लागत की भरपाई की जा सके।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के चलते बिजली की व्यापक और लंबे समय तक चलने वाली कटौती हो रही है । इस भीषण गर्मी ने कई जिलों में तापमान को 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंचा दिया है।
बढ़ते तापमान के कारण बिजली की खपत में काफी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि घर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और उद्योग इस भीषण मौसम का सामना करने के लिए कूलिंग उपकरणों और अन्य बिजली के उपकरणों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
इसके परिणामस्वरूप, पूरे राज्य में बिजली की मांग में तेजी से उछाल आया है और बताया जा रहा है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार मांग में लगभग 5,000 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश ने हाल के वर्षों में अपने ट्रांसमिशन इंफ़्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है और अपनी बिजली ट्रांसमिशन क्षमता को बढ़ाया है। हालांकि अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की तेजी से बढ़ती मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है।
–आईएएनएस
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