नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान शूटिंग की घटना को लेकर भारत के पूर्व डिप्लोमैट्स ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत की। भारत के पूर्व डिप्लोमैट्स ने इस घटना को सुरक्षा में बड़ी चूक बताया। पूर्व डिप्लोमैट केपी फैबियन ने हमले का ईरान के साथ कनेक्शन को लेकर कहा कि इसके अभी तक कोई संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच की जानी चाहिए।
शूटिंग को लेकर पूर्व डिप्लोमैट केपी फैबियन ने कहा, “कुछ बातें साफ हैं। पहली, यह बहुत राहत की बात है कि न तो प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप, न ही फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और न ही कोई मेहमान घायल हुआ। हालांकि, एक सिक्योरिटी एजेंट घायल हुआ है और अपराधी को पकड़ लिया गया है। दूसरी, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शांति और संयम दिखाया। वह कंट्रोल में दिखे और भावुक नहीं थे।”
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया के नेता जरूर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। एफबीआई से उम्मीद है कि वह आरोपी के संपर्क, संचार और सोशल मीडिया एक्टिविटी की जांच करेगी ताकि यह पता चल सके कि उन पर कोई असर हुआ था या उन्हें मैनिपुलेट किया गया था।”
अमेरिका और ईरान के बीच काफी तनाव है, ऐसे में लोग इस हमले का कनेक्शन तेहरान से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर पूर्व डिप्लोमैट ने कहा, “अभी किसी विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसी के शामिल होने का कोई संकेत नहीं है, क्योंकि प्रेसिडेंट ट्रंप बिना किसी इमोशन के चीजों को समझदारी से देखने में काबिल हैं, तो उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच जो हो रहा है, उसके बारे में भी यही नजरिया सामने लाना चाहिए।”
वहीं इस मामले में रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा, “यह बहुत, बहुत गंभीर घटना थी। सिक्योरिटी में बहुत बड़ी चूक, हालांकि एफबीआई और एफबीआई के पुराने डायरेक्टर यह नहीं मान रहे हैं कि कोई बड़ी चूक हुई थी। उन्होंने कहा कि यह आदमी सदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया का छात्र है, जो अमेरिका की जानी-मानी यूनिवर्सिटी में से एक है। उसके प्रोफेसरों से बात की गई है; एक प्रोफेसर ने कहा कि वह तेज इंजीनियरिंग स्टूडेंट था। उसके पास से एक हैंडगन, एक शॉटगन, एक पिस्टल और कई चाकू मिला है। इसका मतलब है कि उसने इस ऑपरेशन की बहुत अच्छी तरह से तैयारी की थी। माना जा रहा है कि वह कई दिन पहले ही होटल में घुस गया था और बाद में इन हथियारों को अंदर ले आया था।”
रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप को आज क्रिटिक्स अब तक के अलोकप्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति में से एक बता रहे हैं। कुछ अमेरिकियों का कहना है कि उन्होंने चुनाव से पहले वादा किया था कि वह कभी भी अमेरिका को युद्ध के हालात में शामिल नहीं करेंगे और शांति स्थापित वाले के तौर पर काम करेंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा।”
उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि उनकी अपनी पार्टी बंटी हुई है, नाटो कथित तौर पर उनके खिलाफ है, यूरोपीय यूनियन उनके खिलाफ है और यहां तक कि कुछ साथी देश भी उनके खिलाफ हैं।
इसके अलावा, पूर्व डिप्लोमैट दीपक वोहरा ने इस घटना को लेकर कहा, “सबसे पहली बात, यह व्हाइट हाउस में कोई सुरक्षा में चूक नहीं था। यह हिल्टन होटल नाम के एक होटल में हुआ, जो नॉर्थ-वेस्ट वाशिंगटन में है। हमारा दूतावास वाशिंगटन डीसी के बहुत पास है, जहां मैं काम करता था। मैं कई बार इस होटल में खाना खाने आता था। हमारे डेलिगेशन यहां रहे हैं। अमेरिका में, होटलों में अभी तक ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि कोई बहुत बड़ा फंक्शन होना है तो पूरा होटल खाली कर दो। इसने तीन-चार दिन पहले चेक-इन कर लिया था। वह आता-जाता रहा और हथियार के पुर्जे अलग-अलग करके ले गया था, जिसे वह बाद में असेंबल किया। जिस दिन ये कार्यक्रम होना था, यह व्यक्ति वहां पहुंचा।”
पूर्व डिप्लोमैट ने आगे कहा कि जो मुझे बताया गया है उसके अनुसार, मेटल डिटेक्टर में आवाज आई, जिसके बाद ये व्यक्ति भागा। और सुरक्षा एजेंसी ने इसे पकड़ लिया।
उन्होंने आगे कहा, “उसी समय, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस, जो राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, उसकी दो यूनिट हैं- एक यूनिफॉर्म्ड डिवीजन और दूसरी सीक्रेट सर्विस। एफबीआई सुरक्षा नहीं देती; वह सिर्फ जांच करती है। संदिग्ध ने गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुआ।”
–आईएएनएस
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