यूपी: हर दिन तीन लोग साइबर ठगी का शिकार, देश में चौथे पायदान पर लखनऊ, डिजिटल अरेस्ट ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में लखनऊ में साइबर ठगी के मामलों में कुछ कमी दर्ज की गयी है। वर्ष 2024 में शहर में 1292 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। यानी औसतन हर दिन तीन और हर महीने 106 से अधिक लोग जालसाजों के चंगुल में फंसे।एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराध के मामलों में लखनऊ देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर बेंगलुरु, दूसरे पर हैदराबाद और तीसरे पर पटना है। लखनऊ में डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग में निवेश, ब्लैकमेलिंग और साइबर यौन हिंसा से जुड़े मामले सबसे ज्यादा सामने आए। वर्ष 2023 में 1453 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 1292 रह गयी।

साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिस विभाग साइबर हेल्प डेस्क, साइबर थाना, जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन नंबर 1930 संचालित कर रहा है। इसके बावजूद जालसाज नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने लोगों से अनजान लिंक पर क्लिक न करने, वीडियो कॉल पर निजी जानकारी साझा न करने और संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करने की अपील की है।

वर्ष 2024 की बड़ी साइबर घटनाएं

19 नवंबर : ठाकुरगंज में रिटायर्ड कर्मचारी से 19.50 लाख की ठगी।

14 अगस्त : पीजीआई की डॉक्टर रुचिका टंडन से 2.81 करोड़ ऐंठे।

26 जून : हजरतगंज निवासी डॉक्टर की पत्नी से 2.71 करोड़ ठगे।

12 जून : एकेटीयू के बैंक खाते से 120 करोड़ रुपये उड़ाए।

मई 2024 : केजीएमयू की डॉक्टर सौम्या गुप्ता से 85 लाख की ठगी।

शेयर ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट पर नहीं लग रही लगाम

साइबर जालसाज खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस अधिकारी या आरबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। फर्जी वारंट और गिरफ्तारी का भय दिखाकर डिजिटल अरेस्ट करते हैं। वहीं शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर भी ठगी की जा रही है।

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