भारत-जापान रिश्तों को मजबूत करने पर जोर, कोबायाशी ने भारतीय नेताओं से की मुलाकात


नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। जापान की सत्तारूढ़ पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की पॉलिसी रिसर्च काउंसिल के चेयरपर्सन ताकायुकी कोबायाशी ने सोमवार को भारत दौरा खत्म करने से पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-जापान रिश्तों की रणनीतिक अहमियत को फिर से दोहराया और आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

इससे पहले दिन में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की, जिसमें व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर बात हुई।

पीयूष गोयल ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “ताकायुकी कोबायाशी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई, जो जापान की सत्तारूढ़ पार्टी एलडीपी की पॉलिसी रिसर्च काउंसिल के चेयरपर्सन हैं।”

उन्होंने बताया कि बातचीत में भारत-जापान के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने, एमएसएमई (छोटे और मझोले उद्योगों) के बीच साझेदारी बढ़ाने और ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

गोयल ने यह भी कहा कि भारत से निर्यात बढ़ाने और बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत बिजनेस माहौल को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और सीईपीए व इंडो-पैसिफिक के आर्थिक ढांचे के तहत आगे के रास्तों पर भी काम करेगा।

रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कोबायाशी ताकायुकी और जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ “अच्छी और उपयोगी” बातचीत की।

इस दौरान दोनों पार्टियों के बीच संवाद बढ़ाने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने पर जोर दिया गया। नबीन ने भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।

बैठक के बाद कोबायाशी ने एक्‍स अकाउंट पर लिखा, “जापान और भारत सिर्फ बड़े देश ही नहीं हैं, बल्कि समृद्ध सभ्यताओं और लंबे इतिहास वाले देश हैं। सुरक्षा, आर्थिक और औद्योगिक निवेश और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाकर दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि के लिए जरूरी है। इसी दिशा में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ हमने पार्टी-टू-पार्टी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।”

जब दुनिया में सप्लाई चेन बदल रही हैं और कंपनियां चीन के बाहर निवेश के नए विकल्प ढूंढ रही हैं, ऐसे में भारत एक लंबे समय के लिए मजबूत निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। खासकर जापान की मिड-साइज कंपनियां भारतीय एमएमएमईएस के साथ मिलकर अच्छा विकास कर सकती हैं।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


Related Articles

Latest News