एस जयशंकर की जमैका यात्रा, आपदा राहत के लिए भारत की ओर से सौंपे ‘मोबाइल अस्पताल सिस्टम’


नई द‍िल्‍ली, 4 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जमैका की यात्रा के दौरान वहां के प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने और संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

विदेश मंत्री ने सोशल मीड‍िया अकाउंट ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में कहा, “किंग्स्टन में जमैका के प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस से मिलकर खुशी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन पहुंचाया। हमारे राजनीतिक, आर्थिक और आपसी सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। भारत-जमैका संबंधों को और मजबूत बनाने के प्रति उनके समर्पण की सराहना करता हूं।”

व‍िदेश मंत्री जयशंकर ने बताया क‍ि इस मुलाकात के दौरान जमैका के स्वास्थ्य मंत्री क्रिस्टोफर टफ्टन और विदेश मंत्री कामिना जॉनसन स्मिथ की मौजूदगी में भारत की ओर से जमैका को तोहफे के तौर पर दस भीष्‍म क्‍यूब औपचारिक रूप से सौंपे गए।

तेजी से तैनात किए जाने के लिए डिजाइन किया गया भीष्‍म क्‍यूब मोबाइल अस्पताल सिस्टम, आपदाओं और आपात स्थितियों के दौरान जमैका की मदद करेगा। इन क्यूब्स का यह तोहफा दोस्ती का प्रतीक है, आपदा से निपटने की तैयारी के प्रति एक प्रतिबद्धता है, और इनोवेशन का नतीजा है।

बता दें कि विदेश मंत्री जयशंकर 2-10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो के आधिकारिक दौरे पर हैं। गिरमिटिया समुदायों की मौजूदगी की वजह से इन देशों का भारत के साथ एक खास कनेक्शन है।

इस दौरे के दौरान, विदेश मंत्री तीनों देशों के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

इससे पहले जयशंकर ने अपने कैरेबियाई दौरे के दौरान जमैका के ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जो भारतीय प्रवासियों के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है। इस दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय से मुलाकात की और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

विदेश मंत्री ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “ऐतिहासिक स्थल ओल्ड हार्बर का दौरा करके बहुत खुशी हुई, जहां 180 साल से भी सबसे पहले भारतीय जमैका पहुंचे थे। भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत की और देखा कि उन्होंने अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को किस तरह सहेजकर रखा है।”

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


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